पईथागोरस थेओरम ! ___________________ एक प्रमेय होती है जिसका हम नवमी-दसमी से लेकर बारह्वी कक्षा तक प्रयोग करते हैं, जिसे हम पईथागोरस थेओरम कहते हैं| पईथागोरस का जन्म हुआ ईशा से आठ शताब्दी पहले और ईशा के पंद्रहवी शताब्दी पहले के भारत के गुरुकुलों के रिकार्ड्स बताते हैं कि वो प्रमेय हमारे यहाँ था, उसको हम बोधायन प्रमेय के रूप में पढ़ते थे| बोधायन एक महिर्षि हुए उनके नाम से भारत में ये प्रमेय ईशा के जन्म के पंद्रहवी शताब्दी पहले पढाई जाती थी यानि आज से लगभग साढ़े तीन हज़ार साल पहले भारत में वो प्रमेय पढाई जाती थी, बोधायन प्रमेय के नाम से और वो प्रमेय है - किसी आयत के विकर्ण द्वारा व्युत्पन्न क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई द्वारा पृथक-पृथक व्युत्पन्न क्षेत्र फलों के योग के बराबर होता है। तो ये प्रमेय महिर्षि बोधायन की देन है जिसे हम आज भी पढ़ते हैं और पईथागोरस ने बेईमानी करके उसे अपने नाम से प्रकाशित करवा लिया है और सारी दुनिया आजतक भ्रम में है | --------------------------------------------------------------------------------------------- शुल्ब सूत्र या शुल्बसूत्र संस्कृत के सूत्रग्रन्थ हैं जो स्रौत कर्मों से सम्बन्धित हैं। इनमें यज्ञ-वेदी की रचना से सम्बन्धित ज्यामितीय ज्ञान दिया हुआ है। संस्कृत कें शुल्ब शब्द का अर्थ नापने की रस्सी या डोरी होता है। अपने नाम के अनुसार शुल्ब सूत्रों में यज्ञ-वेदियों को नापना, उनके लिए स्थान का चुनना तथा उनके निर्माण आदि विषयों का विस्तृत वर्णन है। ये भारतीय ज्यामिति के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। शुल्बसूत्र, स्रौत सूत्रों के भाग हैं ; स्रौतसूत्र, वेदों के उपांग (appendices) हैं। शुल्बसूत्र ही भारतीय गणित के सम्बन्ध में जानकारी देने वाले प्राचीनतम स्रोत हैं। ------------------------------------------------------------------------------------------- शुल्बसूत्रों में बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे प्राचीन माना जाता है। इन शुल्बसूत्रों का रचना समय १२०० से ८०० ईसा पूर्व माना गया है। अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियम दिया है- दीर्घचातुरास्रास्याक्ष्नाया रज्जुः पार्च्च्वमानी तिर्यङ्मानीच | यत्पद्ययग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति || एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं। यहीं तो पाइथागोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। दरअसल इस प्रमेय को बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय कहा जाना चाहिए। --------------------------------------------------------------------------- अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें : http://www.youtube.com/watch?v=Uq2moF38H4M
साँप काटने का इलाज ! ______________________________________ दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के साँप है ! जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है ! ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 साँप है जो जहरीले है सिर्फ 10 ! बाकी सब non poisonous है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा !! बिलकुल चिंता मत करिए ! लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी heart attack से मर जाता है !जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए ! वो डर कैसे निकलेगा ???? जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं ! जिनके काटने से कोई मरता है ! इनमे से जो सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है ! russell viper ! उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra जिसको आप कहते है काला नाग !! ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले है इनमे से किसी ने काट लिया तो 99 % chances है कि death होगी ! लेकिन अगर आप थोड़ी होशियारी दिखाये तो आप रोगी को बचा सकते हैं होशियारी क्या दिखनी है ??? आपने देखा होगा साँप जब भी काटता है तो उसके दो दाँत है जिनमे जहर है जो शरीर के मास के अंदर घुस जाते हैं ! और खून मे वो अपना जहर छोड़ देता है ! तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है ! मान लीजिये हाथ पर साँप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और heart तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा ! और पूरे मे खून मे पूरे शरीर मे उसे पहुँचने मे 3 घंटे लगेंगे ! मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा ! जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुँच जाएगा तभी उसकी death होगी otherwise नहीं होगी ! तो 3 घंटे का time है रोगी को बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है ! क्या कर सकते हैं ?? ??? घर मे कोई पुराना इंजेक्शन (injection) हो तो उसे ले और आगे जहां सुई(needle) लगी होती है वहाँ से काटे ! सुई(needle) जिस पलास्टिक मे फिट होती है उस प्लास्टिक वाले हिस्से को काटे !! जैसे ही आप सुई के पीछे लगे पलास्टिक वाले हिस्से को काटेंगे तो वो injection एक सक्षम पाईप की तरह हो जाएगा ! बिलकुल वैसा ही जैसा होली के दिनो मे बच्चो की पिचकारी होती है ! उसके बाद आप रोगी के शरीर पर जहां साँप ने काटा है वो निशान ढूँढे ! बिलकुल आसानी से मिल जाएगा क्यूंकि जहां साँप काटता है वहाँ कुछ सूजन आ जाती है और दो निशान जिन पर हल्का खून लगा होता है आपको मिल जाएँगे ! अब आपको वो injection( जिसका सुई वाला हिस्सा आपने काट दिया है) लेना है और उन दो निशान मे से पहले एक निशान पर रख कर उसको खीचना है ! जैसी आप निशान पर injection रखेंगे वो निशान पर चिपक जाएगा तो उसमे vacuum crate हो जाएगा ! और आप खींचेगे तो खून उस injection मे भर जाएगा ! बिलकुल वैसे ही जैसे बच्चे पिचकारी से पानी भरते हैं ! तो आप इंजेक्शन से खींचते रहिए !और आप first time निकलेंगे तो देखेंगे कि उस खून का रंग हल्का blackish होगा या dark होगा तो समझ लीजिये उसमे जहर मिक्स हो गया है ! तो जब तक वो dark और blackish रंग blood निकलता रहे आप खिंचीये ! तो वो सारा निकल आएगा ! क्यूंकि साँप जो काटता है उसमे जहर ज्यादा नहीं होता है 0.5 मिलीग्राम के आस पास होता है क्यूंकि इससे ज्यादा उसके दाँतो मे रह ही नहीं सकता ! तो 0.5 ,0.6 मिलीग्राम है दो तीन बार मे आपने खीच लिया तो बाहर आ जाएगा ! और जैसे ही बाहर आएगा आप देखेंगे कि रोगी मे कुछ बदलाव आ रहा है थोड़ी consciousness (चेतना) आ जाएगी ! साँप काटने से व्यकित unconsciousness हो जाता है या semi consciousness हो जाता है और जहर को बाहर खींचने से चेतना आ जाती है ! consciousness आ गई तो वो मरेगा नहीं ! तो ये आप उसके लिए first aid (प्राथमिक सहायता) कर सकते हैं ! इसी injection को आप बीच से कट कर दीजिये बिलकुल बीच कट कर दीजिये 50% इधर 50% उधर ! तो आगे का जो छेद है उसका आकार और बढ़ जाएगा और खून और जल्दी से उसमे भरेगा ! तो ये आप रोगी के लिए first aid (प्राथमिक सहायता) के लिए ये कर सकते हैं ! ____________________________ दूसरा एक medicine आप चाहें तो हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है homeopathy मे आती है ! उसका नाम है NAJA (N A J A ) ! homeopathy medicine है किसी भी homeopathy shop मे आपको मिल जाएगी ! और इसकी potency है 200 ! आप दुकान पर जाकर कहें NAJA 200 देदो ! तो दुकानदार आपको दे देगा ! ये 5 मिलीलीटर आप घर मे खरीद कर रख लीजिएगा 100 लोगो की जान इससे बच जाएगी ! और इसकी कीमत सिर्फ पाँच रुपए है ! इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 70 से 80 रुपए की उससे आप कम से कम 10000 लोगो की जान बचा सकते हैं जिनको साँप ने काटा है ! और ये जो medicine है NAJA ये दुनिया के सबसे खतरनाक साँप का ही poison है जिसको कहते है क्रैक ! इस साँप का poison दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है ! इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को काटा तो उसे भगवान ही बचा सकता है ! medicine भी वहाँ काम नहीं करती उसी का ये poison है लेकिन delusion form मे है तो घबराने की कोई बात नहीं ! आयुर्वेद का सिद्धांत आप जानते है लोहा लोहे को काटता है तो जब जहर चला जाता है शरीर के अंदर तो दूसरे साँप का जहर ही काम आता है ! तो ये NAJA 200 आप घर मे रख लीजिये !अब देनी कैसे है रोगी को वो आप जान लीजिये ! 1 बूंद उसकी जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे !! 3 बार डाल के छोड़ दीजिये !बस इतना काफी है ! और राजीव भाई video मे बताते है कि ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए बचा लेगी ! और साँप काटने के एलोपेथी मे जो injection है वो आम अस्तप्तालों मे नहीं मिल पाते ! डाक्टर आपको कहेगा इस अस्तपाताल मे ले जाओ उसमे ले जाओ आदि आदि !! और जो ये एलोपेथी वालो के पास injection है इसकी कीमत 10 से 15 हजार रुपए है ! और अगर मिल जाएँ तो डाक्टर एक साथ 8 से -10 injection ठोक देता है ! कभी कभी 15 तक ठोक देता है मतलब लाख-डेड लाख तो आपका एक बार मे साफ !! और यहाँ सिर्फ 10 रुपए की medicine से आप उसकी जान बचा सकते हैं ! और राजीव भाई इस video मे बताते है कि injection जितना effective है मैं इस दवा(NAJA) की गारंटी लेता हूँ ये दवा एलोपेथी के injection से 100 गुना (times) ज्यादा effective है ! तो अंत आप याद रखिए घर मे किसी को साँप काटे और अगर दवा(NAJA) घर मे न हो ! फटाफट कहीं से injection लेकर first aid (प्राथमिक सहायता) के लिए आप injection वाला उपाय शुरू करे ! और अगर दवा है तो फटाफट पहले दवा पिला दे और उधर से injection वाला उपचार भी करते रहे ! दवा injection वाले उपचार से ज्यादा जरूरी है !! ________________________________ तो ये जानकारी आप हमेशा याद रखे पता नहीं कब काम आ जाए हो सकता है आपके ही जीवन मे काम आ जाए ! या पड़ोसी के जीवन मे या किसी रिश्तेदार के काम आ जाए! तो first aid के लिए injection की सुई काटने वाला तरीका और ये NAJA 200 hoeopathy दवा ! 10 - 10 मिनट बाद 1 - 1 बूंद तीन बार रोगी की जान बचा सकती है !! आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !! यहाँ जरूर click करे ! http://www.youtube.com/watch?v=IB-uIdN0nyk वन्देमातरम ! अमर शहीद Rajiv Dixit जी की जय !!
बैटरी सबसे पहले भारत मे बनी | बैटरी बनाने की जो विधि है जो आधुनिक विज्ञानं ने भी स्वीकार कर रखी है वो महर्षि अगस्त द्वारा दी गयी विधि है | महर्षि अगस्त ने सबसे पहले बैटरी बनाई थी और उसका विस्तार से वर्णन है अगस्त संहिता मे | पूरा बैटरी बनाने की विधि या तकनीक उन्होंने दिया है और कई लोगोने बनाके भी देखा है, और ये तकनीक हजारो वर्ष पहले की है | माने जो सभ्यता बैटरी बनाना जानते हो वो विद्युत् के बारे मे भी जानते होंगे क्योंकि बैटरी येही करता है, कर्रेंट के फ्लो के लिए हि हम उसका उपयोग करते है| ये अलग बात है के वो डायरेक्ट कर्रेंट है और आज की दुनिया मे हम जो उपयोग करते है वो अल्टरनेटिव करेंट है; लेकिन डायरेक्ट कर्रेंट का सबसे पहले जानकारी दुनिया को हुई तो वो भारत मे महर्षि अगस्त को हि है | अगस्त्य संहिता में एक सूत्र हैः संस्थाप्य मृण्मये पात्रे ताम्रपत्रं सुसंस्कृतम्। छादयेच्छिखिग्रीवेन चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥ दस्तालोष्टो निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:। संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्॥ अर्थात् एक मिट्टी का बर्तन लें, उसमें अच्छी प्रकार से साफ किया गया ताम्रपत्र और शिखिग्रीवा (मोर के गर्दन जैसा पदार्थ अर्थात् कॉपरसल्फेट) डालें। फिर उस बर्तन को लकड़ी के गीले बुरादे से भर दें। उसके बाद लकड़ी के गीले बुरादे के ऊपर पारा से आच्छादित दस्त लोष्ट (mercury-amalgamated zinc sheet) रखे। इस प्रकार दोनों के संयोग से अर्थात् तारों के द्वारा जोड़ने पर मित्रावरुणशक्ति की उत्पत्ति होगी। यहाँ पर उल्लेखनीय है कि यह प्रयोग करके भी देखा गया है जिसके परिणामस्वरूप 1.138 वोल्ट तथा 23 mA धारा वाली विद्युत उत्पन्न हुई। स्वदेशी विज्ञान संशोधन संस्था (नागपुर) के द्वारा उसके चौथे वार्षिक सभा में ७ अगस्त, १९९० को इस प्रयोग का प्रदर्शन भी विद्वानों तथा सर्वसाधारण के समक्ष किया गया। अगस्त्य संहिता में आगे लिखा हैः अनेन जलभंगोस्ति प्राणो दानेषु वायुषु। एवं शतानां कुंभानांसंयोगकार्यकृत्स्मृत:॥ अर्थात सौ कुम्भों (अर्थात् उपरोक्त प्रकार से बने तथा श्रृंखला में जोड़े ग! सौ सेलों) की शक्ति का पानी में प्रयोग करने पर पानी अपना रूप बदल कर प्राण वायु (ऑक्सीजन) और उदान वायु (हाइड्रोजन) में परिवर्तित हो जाएगा। फिर लिखा गया हैः वायुबन्धकवस्त्रेण निबद्धो यानमस्तके उदान स्वलघुत्वे बिभर्त्याकाशयानकम्। अर्थात् उदान वायु (हाइड्रोजन) को बन्धक वस्त्र (air tight cloth) द्वारा निबद्ध किया जाए तो वह विमान विद्या (aerodynamics) के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। स्पष्ट है कि यह आज के विद्युत बैटरी का सूत्र (Formula for Electric battery) ही है। साथ ही यह प्राचीन भारत में विमान विद्या होने की भी पुष्टि करता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि हमारे प्राचीन ग्रन्थों में बहुत सारे वैज्ञानिक प्रयोगों के वर्णन हैं, आवश्यकता है तो उन पर शोध करने की। किन्तु विडम्बना यह है कि हमारी शिक्षा ने हमारे प्राचीन ग्रन्थों पर हमारे विश्वास को ही समाप्त कर दिया है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें http://www.youtube.com/watch?v=w_FKQn3HDno
आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ? कोइ बात नही, स्टेप बाय स्टेप समजीये हो जायेगा आश्चर्य ।
पीने के 10 मिनट के बाद ः
कोला की एक गिलास में रही चीनी के दस चम्मच, शरीर के चयापचय की क्रिया के अवरोध से उल्टि का कारण बनता है लेकिन फोस्फोरिक एसिड चीनी की कार्रवाई को रोकता है ।
20 मिनट के बाद ः
खून में इंसुलिन का स्तर बढ जाता है । लिवर चीनी को फॅट में बदल देता है ।
40 मिनट के बाद ः
कैफीन की घूस शरीर में पूरी तरह हो जाती है । आंख में भारीपन आता है । लिवर और खून की चीनी को निपने की प्रक्रिया को लेकर रक्त दबाव बढ जाता है । Adenosine रिसेप्टर्स को अवरोध मिलता है, जीस से तंद्रावस्था या उनींदापन रोका जाता है और इस अवस्था को नकली ताजगी बताया जाता है ।
45 मिनट के बाद ः
शरीर डोपामाइन हार्मोन के उत्पादन को जन्म देता है, जो मस्तिष्क में रहे खुशी का अनुभव कराते केंद्र को उत्तेजित करता है, हेरोइन आपरेशन का ही ये एक सिद्धांत है ।
1 घंटे के बाद ः
फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क के मेल से पाचनतंत्र के मार्ग में चयापचय की क्रिया को बढा देता है । मूत्र के माध्यम से कैल्शियम का विमोचन भी बढ़ जाता है ।
बाद के समय में ः
मूत्रवर्धक प्रभाव का \"खेल\" शुरु होता है । कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क, जो हमारी हड्डियों का हिस्सा है, साथ में सोडियम भी, शरीर से बाहर निकालने की क्रिया शुरु हो जाती है । एक कोका कोला में निहित पानी की पूरी मात्रा, मूत्र द्वारा निकाल दिया जाता है ।
क्या नकली ताजगी का आनंद उठाने के लिये कोक का एक ठंडा बोतल उठाते समय हम अपने गले में क्या रासायनिक \"कॉकटेल\" उतार रहे हैं हमें पता है ?
कोका कोला का सक्रिय संघटक orthophosphoric एसिड है । इसकी उच्च एसिडिटी के कारण, माल सडता नही भले वो कंपनी के विशेष स्टोर में हो, हेर फेर के दरम्यान रास्ते के टेंकर में हो या दुकान में रही बोतलों में हो ।
कंपनी एक ऍड में बहुत होंशियारी मारती है “कोका कोला लाइट विधाउट कैफिन” । जरा इस का पोस्ट मोर्टम करते हैं । इस में ऍक्वा कार्बोनेटेड E150D, E952, E951, E338, E330, Aromas, E211 होता है ।
एक्वा कार्बोनेटेड - एक शानदार पानी है । यह गैस्ट्रिक स्राव में हलचल पैदा करता है आमाशय रस की अम्लता बढ़ जाती है और गैस होने से पेट फुलता है । इसके अलावा, इस्तेमाल होनेवाला पानी कोइ मिनरल वॉटर नही, लेकिन नियमित रूप से उपयोग होता फ़िल्टर्ड पानी का इस्तेमाल किया जाता है ।
E150D – ये एक खाद्य कलर है जो खास तापमान पर चीनी के प्रसंस्करण के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, और केमिकल के साथ या बिना कोइ केमिकल । कोका कोला बनाने के समय अमोनियम सल्फेट जोड़ा जाता है ।
E952 - सोडियम Cyclamate चीनी का विकल्प है । Cyclamate, एक ऐसा सिंथेटिक रासायन है जो चीनी से 200 गुना मीठा है, और एक कृत्रिम स्वीटनर के रूप में प्रयोग किया जाता है । Cyclamate, साकारीन और aspartame, जो प्रयोग के दौरान चूहों के मूत्राशय में कैंसर पैदा करने के कारण साबित हुए, तो 1969 में इन सब पर एफडीए द्वारा प्रतिबंधित डाला गया था । 1975 में जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने प्रतिबंध लगाया और सारा माल जब्त कर लिया था । 1979 में, डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन (इल्ल्युमिनिटी)), क्या मालुम क्यों, cyclamates का पूनर्जन्म करवाया और सुरक्षित होने का सर्टिफिकेट भी दे दिया ।
E950 - Acesulfame पोटेशियम । ये मिथाइल ईथर युक्त पदार्थ है और भी चीनी से 200 गुना अधिक मीठा है । यह हृदय प्रणाली के संचालन में छेड छाड करता है । इसी तरह, हमारे चेतातंत्र पर भी उत्तेजक प्रभाव पैदा कर सकता है और समय जाते यह लत का कारण बन सकता है । Acesulfame शरीर में बहुत बुरी तरह घुल जाता है, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए इस का प्रयोग सलामत नहीं है ।
E951 – ये है Aspartame, मधुमेह रोगियों के लिए चीनी का एक विकल्प है पर रासायनिक द्रष्टि से अस्थिर है : ऊंचे तापमान पर यह मेथनॉल और फेनिलएलनिन में विभाजित हो जाता है । मेथनॉल बहुत खतरनाक है : 5-10ml मेथनॉल ऑप्टिक तंत्रिका पर ऐसा असर करता है की असाध्य अंधापन आ जाता है । Aspartame की जहरिली असर किन मामलों देख सकते हैं: बेहोशी , सिर दर्द , थकान , चक्कर आना, उल्टी , घबराहट , वजन, चिड़चिड़ापन , घबराहट , स्मृति हानि , धुंधली दृष्टि , बेहोशी , जोड़ों में दर्द , अवसाद , प्रजनन , सुनने में हानि आदि । Aspartame इन रोगों को उत्तेजित कर सकता है - ब्रेन ट्यूमर , एमएस ( मल्टीपल स्केलेरोसिस ) , मिर्गी , \'कब्र रोग , क्रोनिक थकान , अल्जाइमर , मधुमेह , मानसिक कमी और तपेदिक ।
E338 - Orthophosphoric एसिड । यह त्वचा और आंखों की जलन पैदा कर सकता है । यह अमोनिया , सोडियम , कैल्शियम , एल्यूमीनियम का फॉस्फोरिक एसिड सोल्ट के उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है । और भी उपयोग, लकड़ी का कोयला और फिल्म टेप के उत्पादन के लिए कार्बनिक संश्लेषण में, आग रोकने की सामग्री , मिट्टी के बरतन , गिलास , उर्वरक , सिंथेटिक डिटर्जेंट , दवा , धातु के उत्पादन के लिए , कपड़ा और तेल उद्योग, कार्बोनेटेड पानी के उत्पादन, पेस्ट्री में सामग्री को तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाता है । यह orthophosphoric एसिड हड्डियों की कमजोरी पैदा कर सकता है , शरीर से कैल्शियम और लोहे के अवशोषण के साथ हस्तक्षेप कर सकता है । अन्य दुष्प्रभाव, प्यास और त्वचा पर चकत्ते हैं ।
E330 - साइट्रिक एसिड । यह व्यापक रूप से प्रकृति में फैला हुआ है और दवा और खाद्य उद्योग में प्रयोग किया जाता है । खून के संरक्षण के लिए - साइट्रिक एसिड ( citrates ) के साल्ट एसिड , संरक्षक , स्टेबलाइजर्स , और चिकित्सा क्षेत्र में और खाद्य उद्योग में उपयोग किया जाता है ।
Aromas - अज्ञात खुशबूदार योजक । अज्ञात इस लिए की इसे छुपाना है । बहाना मोनोपोली का बताया गया है, स्पर्धा के कारण और कोइ ईसका उपयोग ना करे । लेकिन बात इस तरह लिक हुई है की ये पदार्थ मानव भ्रुण के किडनी के सेल्स से बना है । ये बात सच हो या जो बात लिक की गई है, सच या जुठ, उस के पिछे वर्ल्ड पोलिटिक्स का एजन्डा ही काम कर रहा है । दुनिया के देशों की जनता का धर्म भ्रष्ट करना है । जैसे १८५७ में भारतिय सनिकों का धर्म भ्रष्ट करने के लिए कारतूस में गाय और डुक्कर की चरबी मिलाई गई थी । वो कारतूस सिल मुंह से तोडना होता था ।
E211 - सोडियम Benzoate । यह बैक्टीरियल और एंटी फंगल एजेंट के रूप में कुछ खाद्य उत्पादन में प्रयोग किया जाता है । यह एस्पिरिन के प्रति संवेदनशील हैं , जीन को अस्थमा है ऐसे लोगों के लिए सिफारिश नहीं है । ब्रिटेन के शेफील्ड विश्वविद्यालय के पीटर पाईपर द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि ये डीएनए के लिए महत्वपूर्ण नुकसान का कारण बनता है । उनके शब्दों के अनुसार , इस प्रिजर्वेटिव में एक सक्रिय घटक सोडियम बेंजोएट है वो डीएनए को नष्ट नही करता लेकिन उसे निष्क्रिय करता है । यह सिरोसिस और पार्किंसंस रोग जैसे अपक्षयी रोगों को जन्म दे सकता है ।
तो, क्या समज में आया ? खैर, यह कोका कोला का \"गुप्त नुस्खा\" सिर्फ एक विज्ञापन का खेल है और कुछ नही । कैसा भी सिक्रिट हो हम जान गये हैं की ये प्रिजर्वेटिव, खाद्य कलर, स्टेबिलाईजर्स आदी कोकीन का एक कमजोर समाधान है और हमारे लिए तो ये लिगल कोकेन ऍडिक्शन और शुद्ध जहर है ।
अगर, आप कोका कोला के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, तो निम्न सिफारिशों का लाभ उठाओ:
- अमेरिका में खूद कोका कोला से कई वितरक इस पेयजल से अपने ट्रक इंजनों की सफाई करते हैं तो भारत में आप को कौन रोकता है ।
अमेरिका में कई पुलिस अधिकारी अपनी कार में कोका कोला की बोतल रखते हैं । कोइ दुर्घटना होती है तो वो इस से सड़क से खून के दाग साफ करते हैं ।
- कोका कोला कारों के क्रोम सतहों पर से जंग के दाग को हटाने के लिए एक महान प्रवाही है । कार बैटरी से जंग हटाने के लिए, कोक के साथ यह डालना और जंग गायब हो जाएगा ।
- इसमें डुबाया कपडा कुछ मिनिट जंग खाये नट-बोल्ट के उपर घुमाओं वो आसानिसे खुल जायेगा ।
-अच्छा डिटर्जन्ट है, कपड़े से दाग को साफ करने के लिए, गंदे कपड़े पर कोका कोला डालना, वाशिंग पाउडर जोड़ सकते हैं । और सामान्य रूप से कपड़े धोने की मशीन चला सकते हैं । आप परिणाम से आश्चर्यचकित हो जाएगी ।
- यह सस्ता है और प्रभाव पूरी तरह से संतोषजनक है इस लिए भारत के कुछ किसान, कीटनाशक की जगह कोका कोला का उपयोग कर रहे हैं । आप भी करिये ।
कोइ शक नही कि कोका कोला एक बेहतरिन प्रोडक्ट है । लेकिन पीने के लिए नही, अन्य उपयोग के लिए । प्रोपर उपयोग ढूंढ लो, मजा आयेगा इस के उपयोग से ।
शरद पवार का सच जरूर जाने ! _____________________________________ दोस्तो हमारे भारत मे ऐसे कई नेता हैं जो गाय का मांस बेच कर अपना धंधा चला रहे हैं ! और भारत मे जो 3600 क्त्लखाने (registered) चल रहे हैं उनमे से 50 से 60 % इन्ही राजनेताओ के हैं ! जिनकी पूंजी से ये काम चल रहा है !
और जब भी संसद मे गौ ह्त्या को रोकने का विषय आता तो ये चिला -चिला कर खड़े हो जाते है कहते हैं गौ ह्त्या रुकनी नहीं चाहिए ! और उसके विचित्र विचित्र कुतर्क करते हैं ! उनमे से एक नेता शरद पवार जो कृषि मंत्री है उसने एक दिन कुतर्क किया कि गाय की ह्त्या अगर हमने रोक दी तो गाय की संख्या इतनी बढ़ जाएगी उसे हमे रखेंगे कहाँ ???????? ये बयान शरद पवार ने दिया !और मुंबई मे दिया ! और प्रेस कान्फ्रेंस मे दिया ! सौभाग्य की बात थी श्री राजीव दीक्षित जी उस दिन मुंबई मे थे और उस press कान्फ्रेंस मे थे ! अगले दिन राजीव भाई वो बयान की copy लेकर चले गए शरद पवार से मिलने !! राजीव भाई ने पवार से कहा कि आपने बयान दिया है कि अगर गाय को हमने बचा लिया तो इनकी संख्या इतनी बढ़ जाएगी इन्हे रखेंगे कहाँ ? श्री राजीव भाई ने कहा आप क्यूँ परेशान है ? आपके घर मे रखने नहीं आ रहे हम ! इतना तो पक्का है और अगर आपकी बुद्धि इतना की काम करती है कि गाय को बचाने से उसकी संख्या बढ़ जाएगी तो ये तर्क मनुष्य पर भी लागू होना चाहिए ! सीधे सीधे से लागू होता है कि मनुष्यो को क्यूँ बचाया जाये ??? इनकी संख्या बढ़ जाएगी ! तो इसका मतलब मनुष्य की संख्या कम करने के लिए कत्ल करवाईये इनका !! _______________________________________ फिर पवार ने कहा चारा कहाँ से लाएँगे ???? तो राजीव भाई ने कहा भगवान ने इस देश मे व्यवस्था ऐसी की है आप क्यूँ परेशान हैं उसके लिए ??? भगवान की वयवस्था मे आप क्यूँ दखलअंदाजी कर रहे हैं ??? भगवान मे इस देश मे जितनी भी फसल दी है जितनी भी फसलों के बीज दिये हैं ! 1400 किसम की फसले भारत मे होती हैं (गेहूं ,चावल ,जवारी ,उरद ,मूंग आदि आदि ! हरेक फसल के तीन हिस्से है !हरेक पोधे के तीन हिस्से है ऊपर का एक हिस्सा है वो मनुष्यो के लिए है पक्षियो के लिए है ! बीच का एक हिस्सा है वो पशुओ के लिए हैं ! और अंत का जो जड़ वाला हिस्सा है वो धरती माता के लिए है ! प्रकर्ति की बनाई हुई व्यवस्था है इसमे आप क्यूँ परेशान है ???? हिंदुस्तान मे 77 कोटी किसान खेती करते हैं और इनमे से लगभग 60 कोटी किसान ज्वारी पैदा करते हैं ! ज्वारी का बहुत थोड़ा सा हिस्सा मनुष्य के काम आता है ! ज्वारी का पूरा पेड़ आप गिने तो मुश्किल से उसका 10 % हिस्सा मनुष्य के काम आता है ! और बाकी नीचे का 80 से 90 % हिस्सा वो गाय के काम है बैल के काम का है ! भैंस के काम है पशु के काम का है ! तो चारे की कमी कहाँ से आई ???????????? गेहूं की फसल को देख लो ! गेहूं की फसल का 10 % हिस्सा मनुष्य के काम का है बाकी 70 से 85 % गाय के काम है अन्य पशुओ के काम है ! तो चारे की समस्या कहाँ से आई ?????????? गेहूं पैदा हो रहा है ज्वारी पैदा हो रही है ! चावल की फसल का बहुत छोटा सा हिस्सा मनुष्य के काम का है बाकी पशुओ के काम का है तो चारे की कहाँ कमी है इस देश मे ??? आप क्यू परेशान हैं ???? __________________________________________ फिर पवार का तीसरा कुतर्क ! गाय बूढ़ी हो जाती है तो क्यूँ पालणा ????? तो राजीव भाई ने कहा हमारी माता भी बूढ़ी हो जाती है उसको क्यूँ पालणा ????? पवार ने कहा ! माता अलग है गाय अलग है ! राजीव भाई ने कहा मेरे लिए माता और गाय दोनों एक जैसी है ! क्यूंकि बचपन से हमने यही सुना है गाय हमारी माता है ! देश धर्म का नाता है !! तो मेरे लिए माता और गाय दोनों एक सी है ! तो गाय बूढ़ी हो गई इसलिए कत्ल होनी चाहिए तो माता भी बूढ़ी हो गई इस लिए कत्ल होनी चाहिए ! ___________________________________________ फिर पवार का आखिरी कुतर्क !! कि दूध नही देती है तो फोकट मे क्यूँ खिलाने का उसको ??????? तो राजीव भाई ने कहा दूध तो थोड़े दिन के बाद हमारी माता भी नहीं देती है ! हमारी माता तो हमे ज्यादा से ज्यादा 1 साल दूध पिलाती है और ये गौ माता तो जीवन पर्यंत हमको दूध पिलाती है ! इसका स्थान माता से भी ऊंचा है ! _____________________________________ फिर पवार का पूरा दिमाग घूम गया और बोला आपसे बात करना बेकार है ! तो राजीव भाई ने कहा मुझे भी आपसे बात करना बेकार है ! जिस आदमी को इतना नहीं समझता कि गाय को भारत मे घास चारे की कमी नहीं है और बूढ़ी होने पर काट देनी चाहिए ये तो बहुत खतरनाक मानसिकता है ! इससे अच्छे तो अंग्रेज़ थे जो खुलकर कहते थे कि हम तो गाय को काटते है अपने भोजन के लिए !! लेकिन ये काले अंग्रेज़ तो उनसे भी ज्यादा खतरनाक है जो भारतीयता का लबादा ओढ़े हुये हैं और दिमाग मे पूरी अंग्रेज़ियत भारी हुई है !! और अंत राजीव भाई के कहते है कि ये जो कुतर्क है ये शरद पवार का नाम मैंने इसलिए ले लिया क्यूकि वह के प्रतीक व्यक्ति है वरना ये कुतर्क हिंदुस्तान के बहुत सारे पढे लिखे व्यक्तियों के कुतर्क बन चुके हैं !खासकर ऐसे पढे लिखे लोग जिनको कुछ अंग्रेज़ियत की शिक्षा मिली है जो कान्वेंट आदि मे पढे है इंजीनियर डाक्टर आदि बन चुके है उनके भी ये कुतर्क बन चुके हैं ! शरद पवार तो प्रतीक मात्र है वहाँ कोई और भी हो सकता है जो इसी तरह की बात करे ! मित्रो आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहत धान्यावाद ! एक बार यहाँ जरूर click करे
मित्रो लूटेरी काँग्रेस का एक और सच ! क्या आप जानते भारत की पेट्रोल कंपनियो को समुंदर और जमीन से पेट्रोल निकालने और सारी processing करने के बाद पेट्रोल कितने रुपए का पड़ता है ???????????
आप जानेगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे !! की इतना tax लगाकर लूट रही है काँग्रेस !! और 65 साल हो गए देश गरीब से और गरीब होता जा रहा है होता जा रहा है !! जरूर देखे share करे !! http://www.youtube.com/watch?v=aCNwx9SEbGs
गति के तीन नियमों को किसने लिखा है ?? � जानिए और सबको बताइए : http://phys.org/news106238636.html ----------------------------------------------------------------------------
हम सभी न्यूटन के गति के नियमों से परिचित हैं | उन्होंने 5 जुलाई 1687 को अपने कार्य “फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका” में इन नियमों को प्रकाशित किया | लेकिन ......................... न्यूटन के, गति के नियमों की खोज से पहले भारतीय वैज्ञानिक और दार्शनिक महर्षि कणाद ने (600 ईसा पूर्व में) “वैशेशिका सूत्र” दिया था जो शक्ति और गति के बीच संबंध का वर्णन करता है |
Albert Einstein - "We owe a lot to the Indians, who taught us how to count, without which no worthwhile scientific discovery could have been made"
कैंसर बहुत तेज़ी से बड़ रहा है इस देश में । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हात-पैर डाल चुके है । राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … " कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment दिया जाता है उससे death होती है " । माने कैंसर से जादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया । इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance वो बिलकुल ख़तम हो जाते है । जब Chemotherapy दिए जाते है ये बोल कर के हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है तो अछे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage तक वो एक भी नही मर पाया अभी तक । मतलब क्या है Treatment लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हात से गया । डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो जाता ही है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसीको कैंसर हो जाये तो जादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते । उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है। इतना कष्ट कियों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते जादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पड़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है । कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अछि दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखता है । हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीस में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है । इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है जेर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालके ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अछे परिणाम देते है । जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पोहुंच गया तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy सुरु तो नही हो गयी ? अगर सुरु हो गयी है तो आप उसमे हात मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे । और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment सुरु नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है । तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्वबती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है। ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेसा जो खाना खाए उसमे डालडा तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रसेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है । और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तिन कारन है, एक तो कारन है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हात मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में । कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है । महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्वशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुन वोही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है । आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद । वन्देमातरम ।। यहाँ जरूर click करें ! http://www.youtube.com/watch?v=PiRLcKNNKno
Homeopathic Treatment Of Malaria,Typhoid,Dengue, Chikungunya,Swine flue, etc By Rajiv Dixit मित्रो ब्रेनमलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू, इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य प्रकार के बुखार का इलाज पढ़े।
मित्रो बहुत सारे बुखार तेजी से भारत देश मे फैल रहे है । करोडो की संख्या मे लोग इससे प्रभावित हो रहे है। और लाखों लोग मर रहे है। हमेशा की तरह सरकार हाथ पर हाथ रखे तमाशा देख रही है। श्री राजीव दीक्षित जी ने गाँव-गाँव घूम-घूम कर आयुर्वेदिक दवा से लाखो लोगो को बचाया है।। और ये दवा बनानी कितनी आसान है। 20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई का सत् 5gm, 10gm सोंठ (सुखी अदरक), 10 छोटी पीपर के टुकड़े सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती है। एक जगह पर कूटने के बाद एक गिलास पानी में उबलकर काढ़ा बनाना है ठन्डा होने के बाद में सुबह, दोपहर और श्याम दिन में तीन बार पीना चाहिए। नीम गिलोई- इसका जूस डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाए, प्लेटलेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में ये गिलोय ज्यादा बहुत काम आता है। इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं। मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव भाई ने लाखों लोगो को बुखार से मरने से बचाया था ।। अपना अनमोल जीवन और पैसा बचाइए । स्वास्थ्य सबन्धित और अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें !