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Wednesday, September 25, 2013

Don't Drink Pepsi, Coca cola its Toilet Cleaner Read How.


आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ? कोइ बात नही, स्टेप बाय स्टेप समजीये हो जायेगा आश्चर्य ।

पीने के 10 मिनट के बाद ः
कोला की एक गिलास में रही चीनी के दस चम्मच, शरीर के चयापचय की क्रिया के अवरोध से उल्टि का कारण बनता है लेकिन फोस्फोरिक एसिड चीनी की कार्रवाई को रोकता है ।


20 मिनट के बाद ः
खून में इंसुलिन का स्तर बढ जाता है । लिवर चीनी को फॅट में बदल देता है । 

40 मिनट के बाद ः
कैफीन की घूस शरीर में पूरी तरह हो जाती है । आंख में भारीपन आता है । लिवर और खून की चीनी को निपने की प्रक्रिया को लेकर रक्त दबाव बढ जाता है । Adenosine रिसेप्टर्स को अवरोध मिलता है, जीस से तंद्रावस्था या उनींदापन रोका जाता है और इस अवस्था को नकली ताजगी बताया जाता है ।

45 मिनट के बाद ः
शरीर डोपामाइन हार्मोन के उत्पादन को जन्म देता है, जो मस्तिष्क में रहे खुशी का अनुभव कराते केंद्र को उत्तेजित करता है, हेरोइन आपरेशन का ही ये एक सिद्धांत है । 

1 घंटे के बाद ः
फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क के मेल से पाचनतंत्र के मार्ग में चयापचय की क्रिया को बढा देता है । मूत्र के माध्यम से कैल्शियम का विमोचन भी बढ़ जाता है ।

बाद के समय में ः
मूत्रवर्धक प्रभाव का \"खेल\" शुरु होता है । कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क, जो हमारी हड्डियों का हिस्सा है, साथ में सोडियम भी, शरीर से बाहर निकालने की क्रिया शुरु हो जाती है । एक कोका कोला में निहित पानी की पूरी मात्रा, मूत्र द्वारा निकाल दिया जाता है ।

क्या नकली ताजगी का आनंद उठाने के लिये कोक का एक ठंडा बोतल उठाते समय हम अपने गले में क्या रासायनिक \"कॉकटेल\" उतार रहे हैं हमें पता है ?

कोका कोला का सक्रिय संघटक orthophosphoric एसिड है । इसकी उच्च एसिडिटी के कारण, माल सडता नही भले वो कंपनी के विशेष स्टोर में हो, हेर फेर के दरम्यान रास्ते के टेंकर में हो या दुकान में रही बोतलों में हो ।

कंपनी एक ऍड में बहुत होंशियारी मारती है “कोका कोला लाइट विधाउट कैफिन” । जरा इस का पोस्ट मोर्टम करते हैं । इस में ऍक्वा कार्बोनेटेड E150D, E952, E951, E338, E330, Aromas, E211 होता है । 

एक्वा कार्बोनेटेड - एक शानदार पानी है । यह गैस्ट्रिक स्राव में हलचल पैदा करता है आमाशय रस की अम्लता बढ़ जाती है और गैस होने से पेट फुलता है । इसके अलावा, इस्तेमाल होनेवाला पानी कोइ मिनरल वॉटर नही, लेकिन नियमित रूप से उपयोग होता फ़िल्टर्ड पानी का इस्तेमाल किया जाता है ।

E150D – ये एक खाद्य कलर है जो खास तापमान पर चीनी के प्रसंस्करण के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, और केमिकल के साथ या बिना कोइ केमिकल । कोका कोला बनाने के समय अमोनियम सल्फेट जोड़ा जाता है ।

E952 - सोडियम Cyclamate चीनी का विकल्प है । Cyclamate, एक ऐसा सिंथेटिक रासायन है जो चीनी से 200 गुना मीठा है, और एक कृत्रिम स्वीटनर के रूप में प्रयोग किया जाता है । Cyclamate, साकारीन और aspartame, जो प्रयोग के दौरान चूहों के मूत्राशय में कैंसर पैदा करने के कारण साबित हुए, तो 1969 में इन सब पर एफडीए द्वारा प्रतिबंधित डाला गया था । 1975 में जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने प्रतिबंध लगाया और सारा माल जब्त कर लिया था । 1979 में, डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन (इल्ल्युमिनिटी)), क्या मालुम क्यों, cyclamates का पूनर्जन्म करवाया और सुरक्षित होने का सर्टिफिकेट भी दे दिया ।

E950 - Acesulfame पोटेशियम । ये मिथाइल ईथर युक्त पदार्थ है और भी चीनी से 200 गुना अधिक मीठा है । यह हृदय प्रणाली के संचालन में छेड छाड करता है । इसी तरह, हमारे चेतातंत्र पर भी उत्तेजक प्रभाव पैदा कर सकता है और समय जाते यह लत का कारण बन सकता है । Acesulfame शरीर में बहुत बुरी तरह घुल जाता है, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए इस का प्रयोग सलामत नहीं है ।

E951 – ये है Aspartame, मधुमेह रोगियों के लिए चीनी का एक विकल्प है पर रासायनिक द्रष्टि से अस्थिर है : ऊंचे तापमान पर यह मेथनॉल और फेनिलएलनिन में विभाजित हो जाता है । मेथनॉल बहुत खतरनाक है : 5-10ml मेथनॉल ऑप्टिक तंत्रिका पर ऐसा असर करता है की असाध्य अंधापन आ जाता है । Aspartame की जहरिली असर किन मामलों देख सकते हैं: बेहोशी , सिर दर्द , थकान , चक्कर आना, उल्टी , घबराहट , वजन, चिड़चिड़ापन , घबराहट , स्मृति हानि , धुंधली दृष्टि , बेहोशी , जोड़ों में दर्द , अवसाद , प्रजनन , सुनने में हानि आदि । Aspartame इन रोगों को उत्तेजित कर सकता है - ब्रेन ट्यूमर , एमएस ( मल्टीपल स्केलेरोसिस ) , मिर्गी , \'कब्र रोग , क्रोनिक थकान , अल्जाइमर , मधुमेह , मानसिक कमी और तपेदिक ।

E338 - Orthophosphoric एसिड । यह त्वचा और आंखों की जलन पैदा कर सकता है । यह अमोनिया , सोडियम , कैल्शियम , एल्यूमीनियम का फॉस्फोरिक एसिड सोल्ट के उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है । और भी उपयोग, लकड़ी का कोयला और फिल्म टेप के उत्पादन के लिए कार्बनिक संश्लेषण में, आग रोकने की सामग्री , मिट्टी के बरतन , गिलास , उर्वरक , सिंथेटिक डिटर्जेंट , दवा , धातु के उत्पादन के लिए , कपड़ा और तेल उद्योग, कार्बोनेटेड पानी के उत्पादन, पेस्ट्री में सामग्री को तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाता है । यह orthophosphoric एसिड हड्डियों की कमजोरी पैदा कर सकता है , शरीर से कैल्शियम और लोहे के अवशोषण के साथ हस्तक्षेप कर सकता है । अन्य दुष्प्रभाव, प्यास और त्वचा पर चकत्ते हैं ।

E330 - साइट्रिक एसिड । यह व्यापक रूप से प्रकृति में फैला हुआ है और दवा और खाद्य उद्योग में प्रयोग किया जाता है । खून के संरक्षण के लिए - साइट्रिक एसिड ( citrates ) के साल्ट एसिड , संरक्षक , स्टेबलाइजर्स , और चिकित्सा क्षेत्र में और खाद्य उद्योग में उपयोग किया जाता है ।

Aromas - अज्ञात खुशबूदार योजक । अज्ञात इस लिए की इसे छुपाना है । बहाना मोनोपोली का बताया गया है, स्पर्धा के कारण और कोइ ईसका उपयोग ना करे । लेकिन बात इस तरह लिक हुई है की ये पदार्थ मानव भ्रुण के किडनी के सेल्स से बना है । ये बात सच हो या जो बात लिक की गई है, सच या जुठ, उस के पिछे वर्ल्ड पोलिटिक्स का एजन्डा ही काम कर रहा है । दुनिया के देशों की जनता का धर्म भ्रष्ट करना है । जैसे १८५७ में भारतिय सनिकों का धर्म भ्रष्ट करने के लिए कारतूस में गाय और डुक्कर की चरबी मिलाई गई थी । वो कारतूस सिल मुंह से तोडना होता था । 

E211 - सोडियम Benzoate । यह बैक्टीरियल और एंटी फंगल एजेंट के रूप में कुछ खाद्य उत्पादन में प्रयोग किया जाता है । यह एस्पिरिन के प्रति संवेदनशील हैं , जीन को अस्थमा है ऐसे लोगों के लिए सिफारिश नहीं है । ब्रिटेन के शेफील्ड विश्वविद्यालय के पीटर पाईपर द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि ये डीएनए के लिए महत्वपूर्ण नुकसान का कारण बनता है । उनके शब्दों के अनुसार , इस प्रिजर्वेटिव में एक सक्रिय घटक सोडियम बेंजोएट है वो डीएनए को नष्ट नही करता लेकिन उसे निष्क्रिय करता है । यह सिरोसिस और पार्किंसंस रोग जैसे अपक्षयी रोगों को जन्म दे सकता है ।

तो, क्या समज में आया ? खैर, यह कोका कोला का \"गुप्त नुस्खा\" सिर्फ एक विज्ञापन का खेल है और कुछ नही । कैसा भी सिक्रिट हो हम जान गये हैं की ये प्रिजर्वेटिव, खाद्य कलर, स्टेबिलाईजर्स आदी कोकीन का एक कमजोर समाधान है और हमारे लिए तो ये लिगल कोकेन ऍडिक्शन और शुद्ध जहर है ।

अगर, आप कोका कोला के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, तो निम्न सिफारिशों का लाभ उठाओ:

- अमेरिका में खूद कोका कोला से कई वितरक इस पेयजल से अपने ट्रक इंजनों की सफाई करते हैं तो भारत में आप को कौन रोकता है ।

अमेरिका में कई पुलिस अधिकारी अपनी कार में कोका कोला की बोतल रखते हैं । कोइ दुर्घटना होती है तो वो इस से सड़क से खून के दाग साफ करते हैं ।

- कोका कोला कारों के क्रोम सतहों पर से जंग के दाग को हटाने के लिए एक महान प्रवाही है । कार बैटरी से जंग हटाने के लिए, कोक के साथ यह डालना और जंग गायब हो जाएगा ।

- इसमें डुबाया कपडा कुछ मिनिट जंग खाये नट-बोल्ट के उपर घुमाओं वो आसानिसे खुल जायेगा । 

-अच्छा डिटर्जन्ट है, कपड़े से दाग को साफ करने के लिए, गंदे कपड़े पर कोका कोला डालना, वाशिंग पाउडर जोड़ सकते हैं । और सामान्य रूप से कपड़े धोने की मशीन चला सकते हैं । आप परिणाम से आश्चर्यचकित हो जाएगी ।

- यह सस्ता है और प्रभाव पूरी तरह से संतोषजनक है इस लिए भारत के कुछ किसान, कीटनाशक की जगह कोका कोला का उपयोग कर रहे हैं । आप भी करिये ।

कोइ शक नही कि कोका कोला एक बेहतरिन प्रोडक्ट है । लेकिन पीने के लिए नही, अन्य उपयोग के लिए । प्रोपर उपयोग ढूंढ लो, मजा आयेगा इस के उपयोग से ।

जो कुछ आपने ऊपर पढ़ा उसका सबूत ये विडियो है !
नीचे दिये गए link पढ़ click कर देख सकते हैं !




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इसके इलावा rajiv dixit जी क्या कहते है coke pepsi के बारे मे 
आप यहाँ click कर देख सकते हैं !!




Reality Of Sharad pawar


शरद पवार का सच जरूर जाने !
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दोस्तो हमारे भारत मे ऐसे कई नेता हैं जो गाय का मांस बेच कर अपना धंधा चला रहे हैं ! और भारत मे जो 3600 क्त्लखाने (registered) चल रहे हैं उनमे से 50 से 60 % इन्ही राजनेताओ के हैं ! जिनकी पूंजी से ये काम चल रहा है !


और जब भी संसद मे गौ ह्त्या को रोकने का विषय आता तो ये चिला -चिला कर खड़े हो जाते है कहते हैं गौ ह्त्या रुकनी नहीं चाहिए ! और उसके विचित्र विचित्र कुतर्क करते हैं ! उनमे से एक नेता शरद पवार जो कृषि मंत्री है उसने एक दिन कुतर्क किया कि गाय की ह्त्या अगर हमने रोक दी तो गाय की संख्या इतनी बढ़ जाएगी उसे हमे रखेंगे कहाँ ????????

ये बयान शरद पवार ने दिया !और मुंबई मे दिया ! और प्रेस कान्फ्रेंस मे दिया ! सौभाग्य की बात थी श्री राजीव दीक्षित जी उस दिन मुंबई मे थे और उस press कान्फ्रेंस मे थे ! अगले दिन राजीव भाई वो बयान की copy लेकर चले गए शरद पवार से मिलने !!

राजीव भाई ने पवार से कहा कि आपने बयान दिया है कि अगर गाय को हमने बचा लिया तो इनकी संख्या इतनी बढ़ जाएगी इन्हे रखेंगे कहाँ ?

श्री राजीव भाई ने कहा आप क्यूँ परेशान है ? आपके घर मे रखने नहीं आ रहे हम ! इतना तो पक्का है
और अगर आपकी बुद्धि इतना की काम करती है कि गाय को बचाने से उसकी संख्या बढ़ जाएगी तो ये तर्क मनुष्य पर भी लागू होना चाहिए ! सीधे सीधे से लागू होता है कि मनुष्यो को क्यूँ बचाया जाये ??? इनकी संख्या बढ़ जाएगी ! तो इसका मतलब मनुष्य की संख्या कम करने के लिए कत्ल करवाईये इनका !!
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फिर पवार ने कहा चारा कहाँ से लाएँगे ????

तो राजीव भाई ने कहा भगवान ने इस देश मे व्यवस्था ऐसी की है आप क्यूँ परेशान हैं उसके लिए ???
भगवान की वयवस्था मे आप क्यूँ दखलअंदाजी कर रहे हैं ???

भगवान मे इस देश मे जितनी भी फसल दी है जितनी भी फसलों के बीज दिये हैं ! 1400 किसम की फसले भारत मे होती हैं (गेहूं ,चावल ,जवारी ,उरद ,मूंग आदि आदि ! हरेक फसल के तीन हिस्से है !हरेक पोधे के तीन हिस्से है ऊपर का एक हिस्सा है वो मनुष्यो के लिए है पक्षियो के लिए है !
बीच का एक हिस्सा है वो पशुओ के लिए हैं ! और अंत का जो जड़ वाला हिस्सा है वो धरती माता के लिए है !

प्रकर्ति की बनाई हुई व्यवस्था है इसमे आप क्यूँ परेशान है ????
हिंदुस्तान मे 77 कोटी किसान खेती करते हैं और इनमे से लगभग 60 कोटी किसान ज्वारी पैदा करते हैं ! ज्वारी का बहुत थोड़ा सा हिस्सा मनुष्य के काम आता है ! ज्वारी का पूरा पेड़ आप गिने तो मुश्किल से उसका 10 % हिस्सा मनुष्य के काम आता है ! और बाकी नीचे का 80 से 90 % हिस्सा वो गाय के काम है बैल के काम का है ! भैंस के काम है पशु के काम का है !

तो चारे की कमी कहाँ से आई ????????????

गेहूं की फसल को देख लो ! गेहूं की फसल का 10 % हिस्सा मनुष्य के काम का है बाकी 70 से 85 % गाय के काम है अन्य पशुओ के काम है !
तो चारे की समस्या कहाँ से आई ??????????

गेहूं पैदा हो रहा है ज्वारी पैदा हो रही है ! चावल की फसल का बहुत छोटा सा हिस्सा मनुष्य के काम का है बाकी पशुओ के काम का है
तो चारे की कहाँ कमी है इस देश मे ???
आप क्यू परेशान हैं ????
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फिर पवार का तीसरा कुतर्क !
गाय बूढ़ी हो जाती है तो क्यूँ पालणा ?????

तो राजीव भाई ने कहा हमारी माता भी बूढ़ी हो जाती है उसको क्यूँ पालणा ?????

पवार ने कहा ! माता अलग है गाय अलग है !

राजीव भाई ने कहा मेरे लिए माता और गाय दोनों एक जैसी है ! क्यूंकि बचपन से हमने यही सुना है गाय हमारी माता है ! देश धर्म का नाता है !! तो मेरे लिए माता और गाय दोनों एक सी है !

तो गाय बूढ़ी हो गई इसलिए कत्ल होनी चाहिए तो माता भी बूढ़ी हो गई इस लिए कत्ल होनी चाहिए !
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फिर पवार का आखिरी कुतर्क !!
कि दूध नही देती है तो फोकट मे क्यूँ खिलाने का उसको ???????

तो राजीव भाई ने कहा दूध तो थोड़े दिन के बाद हमारी माता भी नहीं देती है ! हमारी माता तो हमे ज्यादा से ज्यादा 1 साल दूध पिलाती है और ये गौ माता तो जीवन पर्यंत हमको दूध पिलाती है ! इसका स्थान माता से भी ऊंचा है !
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फिर पवार का पूरा दिमाग घूम गया और बोला आपसे बात करना बेकार है !
तो राजीव भाई ने कहा मुझे भी आपसे बात करना बेकार है !
जिस आदमी को इतना नहीं समझता कि गाय को भारत मे घास चारे की कमी नहीं है और बूढ़ी होने पर काट देनी चाहिए ये तो बहुत खतरनाक मानसिकता है ! इससे अच्छे तो अंग्रेज़ थे जो खुलकर कहते थे कि हम तो गाय को काटते है अपने भोजन के लिए !!

लेकिन ये काले अंग्रेज़ तो उनसे भी ज्यादा खतरनाक है जो भारतीयता का लबादा ओढ़े हुये हैं और दिमाग मे पूरी अंग्रेज़ियत भारी हुई है !!

और अंत राजीव भाई के कहते है कि ये जो कुतर्क है ये शरद पवार का नाम मैंने इसलिए ले लिया क्यूकि वह के प्रतीक व्यक्ति है वरना ये कुतर्क हिंदुस्तान के बहुत सारे पढे लिखे व्यक्तियों के कुतर्क बन चुके हैं !खासकर ऐसे पढे लिखे लोग जिनको कुछ अंग्रेज़ियत की शिक्षा मिली है जो कान्वेंट आदि मे पढे है इंजीनियर डाक्टर आदि बन चुके है उनके भी ये कुतर्क बन चुके हैं ! शरद पवार तो प्रतीक मात्र है वहाँ कोई और भी हो सकता है जो इसी तरह की बात करे !

मित्रो आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहत धान्यावाद !

एक बार यहाँ जरूर click करे


https://www.youtube.com/watch?v=9qXURGOKJOE

जय गौमता ! वन्देमातरम !

अमर शहीद Rajiv Dixit जी की जय !!


Why Petrol Price is High - Congress Corruption


मित्रो लूटेरी काँग्रेस का एक और सच !
क्या आप जानते भारत की पेट्रोल कंपनियो को समुंदर और जमीन से पेट्रोल निकालने और सारी processing
करने के बाद पेट्रोल कितने रुपए का पड़ता है ???????????



आप जानेगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे !!
की इतना tax लगाकर लूट रही है काँग्रेस !!
और 65 साल हो गए देश गरीब से और गरीब होता जा रहा है होता जा रहा है !!

जरूर देखे share करे !!

http://www.youtube.com/watch?v=aCNwx9SEbGs



गति के तीन नियमों और महर्षि कणाद



गति के तीन नियमों को किसने लिखा है ?? � 
जानिए और सबको बताइए : http://phys.org/news106238636.html 
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हम सभी न्यूटन के गति के नियमों से परिचित हैं | उन्होंने 5 जुलाई 1687 को अपने कार्य “फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका” में इन नियमों को प्रकाशित किया |

लेकिन .........................

न्यूटन के, गति के नियमों की खोज से पहले भारतीय वैज्ञानिक और दार्शनिक महर्षि कणाद ने (600 ईसा पूर्व में) “वैशेशिका सूत्र” दिया था जो शक्ति और गति के बीच संबंध का वर्णन करता है |

Albert Einstein - "We owe a lot to the Indians, who taught us how to count, without which no worthwhile scientific discovery could have been made"

कैंसर के लिए क्या करे ? - Homeopathic Treatment Of Cancer


कैंसर बहुत तेज़ी से बड़ रहा है इस देश में । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हात-पैर डाल चुके है ।
राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … " कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment दिया जाता है उससे death होती है " । माने कैंसर से जादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है आप सभी जानते है .. Chemotherapy
दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया ।

इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance वो बिलकुल ख़तम हो जाते है । जब Chemotherapy दिए जाते है ये बोल कर के हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है तो अछे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage तक वो एक भी नही मर पाया अभी तक । 

मतलब क्या है Treatment लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हात से गया । डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो जाता ही है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसीको कैंसर हो जाये तो जादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते । 

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है। इतना कष्ट कियों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते जादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पड़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अछि दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखता है । हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीस में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है । 

इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है जेर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालके ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अछे परिणाम देते है । जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पोहुंच गया तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy सुरु तो नही हो गयी ? अगर सुरु हो गयी है तो आप उसमे हात मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे । और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment सुरु नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है । 

तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्वबती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।

ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेसा जो खाना खाए उसमे डालडा तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रसेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।

और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तिन कारन है, एक तो कारन है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हात मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।
कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है । 

महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्वशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुन वोही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है । 
आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद ।
वन्देमातरम ।।

यहाँ जरूर click करें !

http://www.youtube.com/watch?v=PiRLcKNNKno



WTO Agreement Impact on INDIAN Economy Exposed



देश मे ऐसे सरकार चाहिए ! जो WTO समझोते को रद्द करे !
भारत के लिए फांसी का फंदा है ये !
यहाँ click कर विस्तार से जाने !

http://www.youtube.com/watch?v=LATgjt6V-qA


ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू, इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य प्रकार के बुखार का इलाज


Homeopathic Treatment Of Malaria,Typhoid,Dengue, Chikungunya,Swine flue, etc By Rajiv Dixit

मित्रो ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू, इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य प्रकार के बुखार का इलाज पढ़े।


मित्रो बहुत सारे बुखार तेजी से भारत देश मे फैल रहे है । करोडो की संख्या मे लोग इससे प्रभावित हो रहे है। और लाखों लोग मर रहे है। हमेशा की तरह सरकार हाथ पर हाथ रखे तमाशा देख रही है।

श्री राजीव दीक्षित जी ने गाँव-गाँव घूम-घूम कर आयुर्वेदिक दवा से लाखो लोगो को बचाया है।। और ये दवा बनानी कितनी आसान है।

20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई का सत् 5gm, 10gm सोंठ (सुखी अदरक), 10 छोटी पीपर के टुकड़े सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती है। एक जगह पर कूटने के बाद एक गिलास पानी में उबलकर काढ़ा बनाना है ठन्डा होने के बाद में सुबह, दोपहर और श्याम दिन में तीन बार पीना चाहिए।

नीम गिलोई- इसका जूस डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाए, प्लेटलेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में ये गिलोय ज्यादा बहुत काम आता है।

इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं। मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव भाई ने लाखों लोगो को बुखार से मरने से बचाया था ।।
अपना अनमोल जीवन और पैसा बचाइए ।

स्वास्थ्य सबन्धित और अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें !

http://www.youtube.com/watch?v=-abSZjwsoJw

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कांग्रेस सरकार का आधार कार्ड घोटाला

Aadhaar Card Scam By Congress

Aadhaar Card Scam By Congress 
आधार कार्ड या आधार कांड ??
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2000 करोड़ का है आधार कार्ड घोटाला,
कई गुमनाम कम्पनियों के वारे न्यारे,
सब भारतीयों का डाटाबेस बनाकर अमेरिका को सोंपने की तैयारी
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करोडो रुपये के घोटाले करके भी कांग्रेस सरकार का पेट नहीं भरा तो उसने आधार कार्ड बनाने के नाम पर देश की सुरक्षा से समझोता करके आधार कार्ड घोटाला काण्ड कर डाला | यही नहीं आधार कार्ड बनाने में कई गुमनाम कम्पनियों को ठेके देकर लाभ पहुँचाया गया | नंदन नीलकेनी को आई टी सेक्टर में गिरावट के कारण इनफ़ोसिस छोड़कर आधार कार्ड नामक नौटंकी का हिस्सा बनना पड़ा | मोटी तनख्वाह लेकर नीलकेनी ने
कांगेस अध्यक्षा सोनिया के इशारे पर आधार घोटाले को बखूबी अंजाम दिया |
कई मित्र सोच रहे होंगे कि इस भ्रष्ट सरकार ने आधार कार्ड बनवाकर कम से कम एक अच्छा काम तो किया तो आप गलत है | 2000 करोड़ का आधार घोटाला भले ही सबसे बड़ा घोटाला न हो पर यकीन मानिए सबसे खतरनाक घोटाला यही है क्यूंकि इस घोटाले में देश की सुरक्षा के साथ समझोता किया गया है |

१ ) अगर आप साधारण बुद्धि का उपयोग करे और सोचे कि जिस कांग्रेस सरकार ने घोटालो का नया इतिहास लिख दिया वो लोगो से आधार कार्ड बनवाने के लिए इतना अनुरोध क्यों कर रहे है ??

२ ) जिस कांग्रेस सरकार ने गरीबो को लूटकर आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया उनको आधार कार्ड बनवाने पर सौ रुपये क्यूँ दे रहे है ??

३ ) सोनिया के फोटो के बिना कोई विज्ञापन न देने वाली कांग्रेस क्यूँ आधार कार्ड के विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहा रही है ??

४ ) जब पहचान के लिए पहले से इतने साधन उपलब्ध है तो आधार कार्ड की जरुरत क्यों ??

५ ) जिन सेवाओ में आधार कार्ड की जरुरत नहीं उनमे भी आधार कार्ड की बाध्यता क्यों ??

६ ) आखिर क्या कारण है कि सोनिया गाँधी आधार कार्ड प्रोजेक्ट में इतनी रूचि ले रही है ??
दुदू [राजस्थान ) में २१ करोडवा कार्ड खुद सोनिया गाँधी ने एक समारोह में वितरित किया |

अगर आप सोच रहे है कि आधार कार्ड से किसी को क्या नुकसान हो सकता हैं तो एक उदाहरण से आपको समझाता हूँ |
निकट भविष्य सभी भारतीयों की पहचान सम्बन्धी जानकारी आधार कार्ड के डाटाबेस में दर्ज होगी |
अगर किसी व्यक्ति ने कांग्रेस या बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की तो आधार कार्ड के माध्यम से उसको आसानी से पहचान लिया जाएगा | उसके समस्त बैंक खाते सीज कर दिए जायेंगे क्यूंकि बेंक खाते आधार कार्ड से लिंक होने के कारण उनकी जानकारी आधार डाटाबेस में उपलब्ध होगी | सरकारी योजनाओ में आधार कार्ड का इस्तेमाल होने के कारण उस व्यक्ति को मिल रही समस्त सरकारी सुविधाओ को तुरंत रोक दिया जाएगा | और सीबीआई के द्वारा उसको झूठे केस में फंसाकर गिरफ्तार किये गए व्यक्तियों की संख्या एक से अधिक होने पर उनके फिंगरप्रिंट आधार डाटाबेस से मिलान कर उनकी पहचान सुनिश्चित की जाएगी | उसके बाद किसी एक या अधिक व्यक्तियों को जेल में डाल दिया जाएगा या जहर देकर मार दिया जाएगा |
[जैसे राजीव दीक्षित जी को मारा था )
कांग्रेस हमेशा से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और अमेरिका की गुलाम रही है और आधार डाटाबेस को अंततः बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथो में दे देगी | अगर आपने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के घटिया उत्पादों के खिलाफ आवाज उठायी |तो वे आधार कार्ड के माध्यम से आपकी गतिविधियों पर नजर रख सकती है | अगर आपकी गतिविधियों से अमेरिकी कम्पनियों को किसी प्रकार का नुक्सान हुआ तो सेकड़ो व्यक्तियों में आपको आधार कर या फिंगरप्रिंट के माध्यम से पहचान लिया जाएगा और गोलियों से भून दिया जाएगा | या फिर अस्पताल में आधार नंबर से आपका रजिस्टरेशन होने के बाद अस्पताल की स्वचालित मशीने आपको स्वत ही जहर देकर मार डालेगी क्यूंकि उनको आपके आधार नंबर \"535223..........\" को जहर देने के निर्देश कांग्रेस मुख्यालय या सीआईए से मिल रहे होगे |

मगर सब भेडचाल के कारन आधार कार्ड बनवाने के लिए मरे जा रहे है |
अगर आपने आधार कार्ड अभी तक नहीं बनवाया है तो कृपया न बनवाये |

आधार कार्ड अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के इशारे पर उसकी गुलाम कांग्रेस द्वारा भारत में चलाये गए जासूसी कार्यक्रम का पहला चरण है | अगले चरण में सभी भारतीयों को RFID [रेडिओ चिप या आधार कार्ड चिप ] लगायी जाएगी | इसके लिए सरकार द्वारा तरह -तरह के प्रलोभन भी दिए जायेंगे जो जैसे आधार कार्ड के लिए आजकल दिए जा रहे है | 
यह चिप लगने के बाद आपका छिपना नामुमकिन हो जाएगा | कांग्रेस और सीआईए के एजेंट आपकी स्तिथि का सटीक अनुमान लगा लेंगे क्यूंकि यह चिप सेटेलाईट से जुडी होगी | इसकी बाद कांग्रेसी गुण्डे और सीआईए एजेंट आपको ढूंढ़कर गोलियों से भून देंगे |

इस चिप की साईज गेहु के दाने बराबर है । लेकिन नेनो टेक्नोलोजी के कारण इसमें बहुत से डिवाईस लगे हैं । कहा जाता है की इसमें एक नेनो बंब भी लगाया गया है जो इसे शरीरे के अंदर ही तोड देता है, अंदर छूपये साईनाईड को रिलीज कर देता है । जब कोइ पोलिस अधिकारी कीसी क्रिमिनल को शुट करना चाहता हो तो सिस्टम को अक्सेस कर के करवा सकता है ।

इसके अलावा आधार कार्ड का बहाना लेकर पाकिस्तानी और बंगलादेशी घुसपेठियो को भारत की स्थायी नागरिकता दे दी जायेगी जो रोज आपके शहर में बम धमाके करेंगे और आपकी बहु - बेटियों का अपहरण कर बलात्कार करेंगे और उनको कोई सजा भी नहीं होगी |
ये घुसपेठिये कांग्रेस का वोट बैंक बनकर रहेंगे और सिर्फ कांग्रेस को ही वोट करेंगे जिससे कांग्रेस हमेशा राज कर सकेगी |

सुप्रीम कोर्ट का सरकार को झटका, आधार कार्ड हर जगह नहीं होगा मान्य
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उसकी महत्वकांक्षी योजना आधार को लेकर करारा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने देश में आधार कार्ड को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बतौर पहचान मानने से इंकार कर दिया है। इतना ही नहीं हर नागरिक को पहचान देने वाला आधार कार्ड बनवाना अब अनिवार्य नहीं है। यह बात खुद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कही है। सरकार ने यह भी कहा है कि आधार कार्ड बनाने का फैसला लोगों की इच्छा पर है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र औऱ राज्यों सरकारों को आदेश दिए हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि किसी भी अवैध नागरिक का आधार कार्ड न बने। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि आवश्यक सुविधाओं जैसे एलपीजी, टेलीफोन कनेक्शन वगैरह के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। न्यायालय ने कहा, आधार कार्ड को एक विशुद्ध स्वैच्छिक योजना रहना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सरकार अपनी कई योजनाओं को पहले ही आधार कार्ड से जोड़ चुकी है। ऐसे में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में यह कहना कि इसे बनवाना लोगों की इच्छा पर है उस पर कई सवाल उठते हैं।

न्यायालय ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसमें आधार कार्ड को बंद किए जाने की मांग की गई है। इसके पीछे तर्क दिया है कि आधार कार्ड में कई तरह की कमियां हैं।

दरअसल पहले खबरें थीं कि रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी आधार कार्ड से जुड़े आपके बैंक अकाउंट में आएगी। सब्सिडी की राशि तभी अकाउंट में आएगी, जब आपने आधार कार्ड बनवाकर अपने बैंक अकाउंट से उसे लिंक कराया होगा। यह भी बात सामने आ रही थी कि आधार कार्ड न होने पर मार्केट रेट पर सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। सबसे ज्यादा भ्रम की स्थिति एलपीजी के मसले पर ही थी जो कोर्ट के फैसले के बाद अब दूर हो गई है।

आधार कार्ड के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से मुंह की खाने से कांग्रेस सरकार बौखला सी गयी है ! खबर है की शीतकालीन सत्र मे आधार कार्ड को ले कर एक विधेयक लाया जा सकता है ! ताकि इसे कानूनी रूप दिया जा सके ! — 
must click and watch !

http://www.youtube.com/watch?v=elicZLUmp9s

Wednesday, June 19, 2013

Question About Modi must Read



तर्क की कसौटी पर मोदी और मोदी विरोधी
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इस लेख के जरिए हम मोदी और मोदी विरोधियों से जुड़े कुछ
महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर ढूंढने की कोशिश करेंगे .
1. क्या नरेंद्र मोदी के विरोधी धर्मनिरपेक्ष हैं ?
2. नरेंद्र मोदी पंथनिर्पेक्ष/धर्मनिरपेक्ष हैं कैसे ?
3. क्यों बनाया जा रहा है मोदी को हीं निशाना ?
4. क्या हैं गुजरात चुनावों में नरेंद्र मोदी की हैट्रिक के मायने ?
5. केवल गुजरात दंगों की हीं बात क्यों होती है ?
6. क्या मीडिया का एक खास वर्ग और मोदी के

विरोधी मोदी के विरुद्ध माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं ?
1. क्या नरेंद्र मोदी के विरोधी पंथनिर्पेक्ष हैं ?
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किसी को पंथनिर्पेक्ष या साम्प्रदायिक मानने से पहले
आपको यह समझना होगा कि धर्मनिर्पेक्षता और
साम्प्रदायिकता किसे कहते हैं. हमें यह
समझना होगा कि किसी पार्टी में शामिल हर
व्यक्ति ना तो साम्प्रदायिक ( कट्टरपंथी ) होता है और
ना किसी पार्टी में शामिल हर व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष होता है.
यह कड़वी सच्चाई है कि “धर्मनिर्पेक्षता“ के नाम पर
भारतीयों को बेवकूफ बनाया जाता रहा है.
निर्पेक्षता का अर्थ होता है “निष्पक्षता”, मतलब कोई
व्यक्ति या पार्टी किसी व्यक्ति की जाति या धर्म देखकर
उसे ना कोई खास सुविधा/अधिकार दे और ना उससे कोई
सुविधा/अधिकार छीने. तो हम उस व्यक्ति/
पार्टी को निष्पक्ष मानेंगे. दूसरे धर्म के धार्मिक समारोहों में
शामिल होना या दूसरे धर्म के धार्मिक पहनावे को धारण
करना महज एक दिखावा है, जिसका उपयोग
बड़ी हीं चालाकी से किया जाता रहा है. जिसका उद्देश्य खुद
को निष्पक्ष साबित करना होता है. लेकिन खुद
को धर्मनिर्पेक्ष कहने वाले ये लोग/पार्टियाँ अलग-अलग
धर्मों और जातियों के लिए अलग-अलग योजनाएँ लाते हैं.
मतलब उन जाति/धर्म के लोगों को यह समझाने की कोशिश
की जाती है कि हम आपके धर्म/जाति के हितैषी हैं.
जबकि निष्पक्ष नेता अपने देश/राज्य की पूरी जनता के लिए
कोई योजना लाता है. किसी खास धर्म या जाति के लोगों के
लिए नहीं.
उपर्युक्त उदाहरण के अनुसार आप इस बात को खुद परख
सकते हैं कि मोदी के विरोधियों में कौन निष्पक्ष है और कौन-
कौन निष्पक्षता का ढोंग करता है ?
2. नरेंद्र मोदी पंथनिर्पेक्ष /धर्मनिरपेक्ष हैं कैसे ?
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मोदी ने एक पत्रकार के सवाल का जैसा जवाब दिया, वैसे
जवाब की उम्मीद हम आज की तारीख में किसी नेता से
नहीं कर सकते हैं. एक पत्रकार ने मोदी से सवाल किया,
“आपने अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया ?”. मोदी ने जवाब
दिया, “मैंने अल्पसंख्यकों के लिए कुछ नहीं किया, क्योंकि मैं
अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक देखकर काम नहीं करता. मैं
गुजरात की जनता के लिए काम करता हूँ”.
2012 के गुजरात चुनावों में मुस्लिमबहुल क्षेत्रों से
भाजपा की जीत इस बात को साबित भी करती है कि गुजरात
में मोदी ने किसी खास धर्म या समुदाय के लिए काम
नहीं किया है. मोदी का विकास सबके लिए था, चाहे वो हिन्दू
हो या मुसलमान.
3. क्यों बनाया जा रहा है मोदी को हीं निशाना ?
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मोदी कुछ खास लोगों के निशाने पर होते हैं, क्योंकि कुछ लोग
इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर मोदी एक बार
प्रधानमंत्री बन गए तो उन्हें इस पद से
हटाना उतना हीं मुश्किल होगा, जितना आज की तारीख में उन्हें
गुजरात के मुख्यमंत्री के पद से हटाना है. मतलब मोदी के एक
बार प्रधानमंत्री बनने के बाद विभिन्न पार्टियों के उन
सभी नेताओं के प्रधानमंत्री बनने
की महत्वाकांक्षा धरी की धरी रह जाएगी. जो खुद
को प्रधानमंत्री के पद में बैठा हुआ देखना चाहते हैं. और
इसी कारण से वे नेता हर प्रकार से मोदी को प्रधानमंत्री पद
तक कभी पहुँचने हीं नहीं देना चाहते हैं.
4. क्या हैं गुजरात चुनावों में नरेंद्र मोदी की हैट्रिक के मायने ?
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2012 के गुजरात चुनावों में कभी काँग्रेस यह कहती नजर आई
कि गुजरात में विकास हुआ हीं नहीं, तो कभी राहुल गाँधी यह
कहते नजर आए कि गुजरात के विकास का श्रेय मोदी ने ले
लिया जबकि इसका सेहरा आम गुजराती के सिर बंधना चाहिए.
मतलब कांग्रेस गुजरात के विकास
को कभी नकारती तो कभी मानती नजर आई.
केशुभाई पटेल और कट्टर मोदी विरोधियों के विरोध के बावजूद
मोदी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर यह साबित कर
दिया कि उनके विकास के काम के कारण जनता ने उन्हें वोट
दिया. अगर आज गुजरात विकास का पर्याय बना हुआ है
तो हम इसका श्रेय मोदी को देने के लिए मजबूर हैं.
सरप्लस बिजली, राजनीतिक स्थिरता, श्रमिकों की शांति,
बढ़िया प्रसाशन आदि कई ऐसे कारण हैं जिनके कारण बड़े-बड़े
औद्योगिक इकाइयों ने गुजरात में कदम रखना बेहतर समझा.
नैनो, फोर्ड की नई इकाई, मारुति सुजुकी, बाइक
कम्पनी हीरो मोटर्स, जनरल मोटर्स, फ्युजो नेस्ले,
हिताची जैसी औद्योगिक इकाइयों ने गुजरात में निवेश किया.
इन निवेशों का असर ये हुआ कि गुजरात ने विकास के नए
आयाम छुए और गुजरातियों को नए रोजगार आसानी से प्राप्त
हुए. पिछले एक दशक में गुजरात का विकास दर औसतन 10.5
रहा, जबकि इसी दौरान भारत का औसतन विकास दर 7.9
रहा.
5. केवल गुजरात दंगों की बात होती है ?
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2002 के गुजरात दंगों के नाम पर आज भी मोदी को खलनायक
साबित करने की कोशिश की जाती है. लेकिन 2012 के असम
दंगों के लिए ना तो असम के मुख्यमंत्री को कटघरे में
खड़ा किया जाता है और ना घुसपैठियों को रोकने में असक्षम
होने की बात पर कभी मनमोहन सिंह को दोषी ठहराया जाता है.
और ना हीं किसी और दंगे के लिए
दोषी किसी नेता को कभी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश
की जाती है.
6. क्या मीडिया का एक खास वर्ग और मोदी के
विरोधी मोदी के विरुद्ध माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं ?
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इसका जवाब है, हाँ. क्योंकि मोदी के साथ खड़े होने वाले
व्यक्ति को सीधे साम्प्रदायिक साबित करने की कोशिश होने
लगती है. मोदी के समर्थन का मतलब है, खुद
को साम्प्रदायिक लोगों की सूची में शामिल कर लेना . और
विरोध करने का मतलब है, खुद को धर्मनिरपेक्ष साबित कर
देना.
7. क्या प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं मोदी ?
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आज जब मनमोहन सिंह को एक कमजोर
प्रधानमंत्री कहा जाता है, तो हमें इस बात से इंकार
नहीं करना चाहिए कि हर गठबंधन सरकार का मुखिया मजबूर
होता है. और आज की तारीख में केन्द में गठबंधन सरकार के
अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आता है. ऐसे में मोदी एक
मजबूत नेता के रूप में नजर आते हैं, जो किसी के आगे मजबूर
नहीं होता है. जो अपने विरोधियों से निपटान अच्छी तरह
जनता है. मोदी उन अधूरे कामों को करने में सक्षम नजर आते
हैं, जिन्हें आजादी के बाद से आजतक विभिन्न पार्टियों के कई
बड़े नेता नहीं कर पाए हैं.
सरदार पटेल जैसे कद्दावर नेता की छवि आज केवल मोदी में
हीं नजर आती है. सरदार पटेल ने 563 देशी रियासतों को भारत
में शामिल किया था जबकि उनके बाद आजतक कोई
ऐसा नेता भी नहीं हुआ, जिसने आजादी के 60 से
भी ज्यादा वर्ष बीत जाने के बावजूद कश्मीर
समस्या का भी हल निकाल पाया हो. और जिसका नतीजा है
कि भारत को अपने सैनिकों की कुर्बानी आज भी देनी पड़ती है.
और आज भी कश्मीर समस्या भारत के लिए सिरदर्द बना हुआ
है. अगर इस मुद्दे को कोई हल कर सकता है तो वो कोई
मजबूत नेता हीं, और गठबंधन के इस दौर में मोदी के
अलावा किसी अन्य नेता में एक मजबूत नेता की छवि नजर
नहीं आती है. दूसरे नेताओं में केवल मजबूर
प्रधानमंत्री की छवि नजर आती है.
आजादी के इतने वर्ष बीतने के बावजूद आजतक भारत
की सीमाएँ सील नहीं की गई है. जिस कारण घुसपैठिए भारत में
आसानी से आते हैं और यहाँ के सुरक्षा में सेंध लगाते रहते हैं.
मोदी इस काम को भी करने में पूरी तरह सक्षम नजर आते हैं.
मोदी इसी तरह के मजबूत और बड़े फैसले लेने में सक्षम नजर
आते हैं. जो शायद कोई और नेता नहीं ले सकता है.

iamhinduism

Puranas - पुराण



पुराण, हिंदुओं के धर्मसंबंधी आख्यानग्रंथ हैं जिनमें सृष्टि, लय,
प्राचीन ऋषियों, मुनियों और राजाओं के वृत्तात आदि हैं। ये
वैदिक काल के काफ़ी बाद के ग्रन्थ हैं, जो स्मृति विभाग में आते
हैं। भारतीय जीवन-धारा में जिन ग्रन्थों का महत्वपूर्ण स्थान
है उनमें पुराण भक्ति-ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते
हैं। अठारह पुराणों में अलग-अलग देवी-देवताओं को केन्द्र
मानकर पाप और पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म, और अकर्म
की गाथाएँ कही गई हैं। कुछ पुराणों में सृष्टि के आरम्भ से अन्त
तक का विवरण किया गया है। इनमें हिन्दू देवी-देवताओं का और
पौराणिक मिथकों का बहुत अच्छा वर्णन है ।

कर्मकांड (वेद) से ज्ञान (उपनिषद्) की ओर आते हुए भारतीय
मानस में पुराणों के माध्यम से भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित
हुई है। विकास की इसी प्रक्रिया में बहुदेववाद और निर्गुण
ब्रह्म की स्वरूपात्मक व्याख्या से धीरे-धीरे मानस अवतारवाद
या सगुण भक्ति की ओर प्रेरित हुआ।
पुराणों में वैदिक काल से चले आते हुए
सृष्टि आदि संबंधी विचारों, प्राचीन राजाओं और ऋषियों के
परंपरागत वृत्तांतों तथा कहानियों आदि के संग्रह के साथ साथ
कल्पित कथाओं की विचित्रता और रोचक
वर्णनों द्वारा सांप्रदायिक या साधारण उपदेश भी मिलते हैं ।
पुराण उस प्रकार प्रमाण ग्रंथ नहीं हैं जिस प्रकार श्रुति,
स्मृति आदि हैं।
पुराणों में विष्णु, वायु, मत्स्य और भागवत में ऐतिहासिक वृत्त
— राजाओं की वंशावली आदि के रूप में बहुत कुछ मिलते हैं । ये
वंशावलियाँ यद्यपि बहुत संक्षिप्त हैं और इनमें परस्पर
कहीं कहीं विरोध भी हैं पर हैं बडे़ काम की । पुराणों की ओर
ऐतिहासिकों ने इधर विशेष रूप से ध्यान दिया है और वे इन
वंशावलियों की छानबीन में लगे हैं ।
शाब्दिक अर्थ एवं महिमा
पुराण का शाब्दिक अर्थ - 'प्राचीन आख्यान' या 'पुरानी कथा'
होता है। ‘पुरा’ शब्द का अर्थ है - अनागत एवं अतीत। ‘अण’
शब्द का अर्थ होता है -कहना या बतलाना। रघुवंश में पुराण
शब्द का अर्थ है "पुराण पत्रापग मागन्नतरम्" एवं वैदिक
वाग्ङय में "प्राचीन: वृत्तान्त:" दिया गया है। सांस्कृतिक
अर्थ से हिन्दू संस्कृति के वे विशिष्ट धर्मग्रंथ जिनमें सृष्टि से
लेकर प्रलय तक का इतिहास-वर्णन शब्दों से किया गया हो,
पुराण कहे जाते है पुराण शब्द का उल्लेख वैदिक युग के वेद
सहित आदितम साहित्य में भी पाया जाता है अत: ये सबसे
पुरातन (पुराण) माने जा सकते हैं। अथर्ववेद के अनुसार "ऋच:
सामानि छन्दांसि पुराणं यजुषा सह ११.७.२") अर्थात्
पुराणों का आविर्भाव ऋक्, साम, यजुस् औद छन्द के साथ
ही हुआ था। शतपथ ब्राह्मण (१४.३.३.१३) में
तो पुराणवाग्ङमय को वेद ही कहा गया है। छान्दोग्य उपनिषद्
(इतिहास पुराणं पञ्चम वेदानांवेदम् ७.१.२) ने भी पुराण को वेद
कहा है। बृहदारण्यकोपनिषद् तथा महाभारत में कहा गया है
कि "इतिहास पुराणाभ्यां वेदार्थ मुपर्बंहयेत्" अर्थात् वेद
का अर्थविस्तार पुराण के द्वारा करना चाहिये। इनसे यह
स्पष्ट है कि वैदिक काल में पुराण तथा इतिहास को समान स्तर
पर रखा गया है। अमरकोष आदि प्राचीन कोशों में पुराण के सर्ग
(सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय, पुनर्जन्म), वंश (देवता व
ऋषि सूचियां), मन्वन्तर (चौदह मनु के काल), और वंशानुचरित
(सूर्य चंद्रादि वंशीय चरित) - ये पांच लक्षण माने गये हैं।
सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वंतराणि च। वंश्यानुचरितं
चैव पुराणं पंचलक्षणम्।
(१) सर्ग – पंचमहाभूत, इंद्रियगण,
बुद्धि आदि तत्त्वों की उत्पत्ति का वर्णन,
(२) प्रतिसर्ग – ब्रह्मादिस्थावरांत संपूर्ण चराचर जगत् के
निर्माण का वर्णन,
(३) वंश – सूर्यचंद्रादि वंशों का वर्णन,
(४) मन्वंतर – मनु, मनुपुत्र, देव, सप्तर्षि, इंद्र और भगवान् के
अवतारों का वर्णन,
(५) वंश्यानुचरित – प्रति वंश के प्रसिद्ध पुरुषों का वर्णन.
माना जाता है कि सृष्टि के रचनाकर्ता ब्रह्माजी ने सर्वप्रथम
जिस प्राचीनतम धर्मग्रंथ की रचना की, उसे पुराण के नाम से
जाना जाता है।
विषयवस्तु
प्राचीनकाल से पुराण देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों -
सभी का मार्गदर्शन करते रहे हैं।पुराण मनुष्य को धर्म एवं
नीति के अनुसार जीवन व्यतीत करने की शिक्षा देते हैं । पुराण
मनुष्य के कर्मों का विश्लेषण कर उन्हें दुष्कर्म करने से रोकते
हैं। पुराण वस्तुतः वेदों का विस्तार हैं । वेद बहुत ही जटिल
तथा शुष्क भाषा-शैली में लिखे गए हैं। वेदव्यास जी ने
पुराणों की रचना और पुनर्रचना की। कहा जाता है, ‘‘पूर्णात
पुराण ’’ जिसका अर्थ है, जो वेदों का पूरक हो, अर्थात् पुराण
( जो वेदों की टीका हैं )। वेदों की जटिल भाषा में कही गई
बातों को पुराणों में सरल भाषा में समझाया गया हैं। पुराण-
साहित्य में अवतारवाद को प्रतिष्ठित किया गया है। निर्गुण
निराकार की सत्ता को मानते हुए सगुण साकार
की उपासना करना इन ग्रंथों का विषय है। पुराणों में अलग-
अलग देवी-देवताओं को केन्द्र में रखकर पाप-पुण्य, धर्म-
अधर्म और कर्म-अकर्म की कहानियाँ हैं। प्रेम, भक्ति, त्याग,
सेवा, सहनशीलता ऐसे मानवीय गुण हैं, जिनके अभाव में उन्नत
समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। पुराणों में देवी-देवताओं
के अनेक स्वरूपों को लेकर एक विस्तृत विवरण मिलता है।
पुराणों में सत्य को प्रतिष्ठित में दुष्कर्म का विस्तृत चित्रण
पुराणकारों ने किया है। पुराणकारों ने देवताओं
की दुष्प्रवृत्तियों का व्यापक विवरण किया है लेकिन मूल
उद्देश्य सद्भावना का विकास और सत्य की प्रतिष्ठा ह
अट्ठारह पुराण
पुराण अठारह हैं । विष्णु पुराण के अनुसार उनके नाम ये हैं—
विष्णु, पद्य, ब्रह्म, शिव, भागवत, नारद, मार्कंडेय, अग्नि,
ब्रह्मवैवर्त, लिंग, वाराह, स्कंद, वामन, कूर्म, मत्स्य, गरुड,
ब्रह्मांड और भविष्य ।
1. ब्रह्म पुराण
2. पद्म पुराण
3. विष्णु पुराण
4. शिव पुराण -- ( वायु पुराण )
5. भागवत पुराण -- ( देवीभागवत पुराण )
6. नारद पुराण
7. मार्कण्डेय पुराण
8. अग्नि पुराण
9. भविष्य पुराण
10. ब्रह्म वैवर्त पुराण
11. लिङ्ग पुराण
12. वाराह पुराण
13. स्कन्द पुराण
14. वामन पुराण
15. कूर्म पुराण
16. मत्स्य पुराण
17. गरुड़ पुराण
18. ब्रह्माण्ड पुराण
पुराणों में एक विचित्रता यह है कि प्रत्येक पुराण में
अठारहो पुराणों के नाम और उनकीश्लोकसंख्या है । नाम और
श्लोकसंख्या प्रायः सबकी मिलती है, कहीं कहीं भेद है । जैसे
कूर्म पुराण में अग्नि के स्थान में वायुपुराण; मार्कंडेय पुराण में
लिंगपुराण के स्थान में नृसिंहपुराण; देवीभागवत में शिव पुराण के
स्थान में नारद पुराण और मत्स्य में वायुपुराण है । भागवत के
नाम से आजकल दो पुराण मिलते हैं—एक श्रीमदभागवत,
दूसरा देवीभागवत । कौन वास्तव में पुराण है इसपर
झगड़ा रहा है । रामाश्रम स्वामी ने 'दुर्जनमुखचपेटिका' में
सिद्ध किया है कि श्रीमदभागवत ही पुराण है । इसपर काशीनाथ
भट्ट ने 'दुर्जनमुखमहाचपेटिका' तथा एक और पंडित ने
'दुर्जनमुखपद्यपादुका' देवीभागवत के पक्ष में लिखी थी
उपपुराण
1. गणेश पुराण
2. नरसिंह पुराण
3. कल्कि पुराण
4. एकाम्र पुराण
5. कपिल पुराण
6. दत्त पुराण
7. श्रीविष्णुधर्मौत्तर पुराण
8. मुद्गगल पुराण
9. सनत्कुमार पुराण
10. शिवधर्म पुराण
11. आचार्य पुराण
12. मानव पुराण
13. उश्ना पुराण
14. वरुण पुराण
15. कालिका पुराण
16. महेश्वर पुराण
17. साम्ब पुराण
18. सौर पुराण
19. पराशर पुराण
20. मरीच पुराण
21. भार्गव पुराण
अन्यपुराण तथा ग्रन्थ
1. हरिवंश पुराण
2. सौरपुराण
3. महाभारत
4. श्रीरामचरितमानस
5. रामायण
6. श्रीमद्भगवद्गीता
7. गर्ग संहिता
8. योगवासिष्ठ
9. प्रज्ञा पुराण
श्लोक संख्या
सुखसागर के अनुसारः
1. ब्रह्मपुराण में श्लोकों की संख्या १४००० और २४६
अद्धयाय है|
2. पद्मपुराण में श्लोकों की संख्या ५५००० हैं।
3. विष्णुपुराण में श्लोकों की संख्या तेइस हजार हैं।
4. शिवपुराण में श्लोकों की संख्या चौबीस हजार हैं।
5. श्रीमद्भावतपुराण में श्लोकों की संख्या अठारह हजार
हैं।
6. नारदपुराण में श्लोकों की संख्या पच्चीस हजार हैं।
7. मार्कण्डेयपुराण में श्लोकों की संख्या नौ हजार हैं।
8. अग्निपुराण में श्लोकों की संख्या पन्द्रह हजार हैं।
9. भविष्यपुराण में श्लोकों की संख्या चौदह हजार पाँच
सौ हैं।
10. ब्रह्मवैवर्तपुराण में श्लोकों की संख्या अठारह हजार
हैं।
11. लिंगपुराण में श्लोकों की संख्या ग्यारह हजार हैं।
12. वाराहपुराण में श्लोकों की संख्या चौबीस हजार हैं।
13. स्कन्धपुराण में श्लोकों की संख्या इक्यासी हजार एक
सौ हैं।
14. वामनपुराण में श्लोकों की संख्या दस हजार हैं।
15. कूर्मपुराण में श्लोकों की संख्या सत्रह हजार हैं।
16. मत्सयपुराण में श्लोकों की संख्या चौदह हजार हैं।
17. गरुड़पुराण में श्लोकों की संख्या उन्नीस हजार हैं।
18. ब्रह्माण्डपुराण में श्लोकों की संख्या बारह हजार हैं।
प्रमुख पुराणों का परिचय
पुराणों में सबसे पुराना विष्णुपुराण ही प्रतीत होता है । उसमें
सांप्रदायिक खींचतान और रागद्वेष नहीं है । पुराण के
पाँचो लक्षण भी उसपर ठीक ठीक घटते हैं । उसमें
सृष्टि की उत्पत्ति और लय, मन्वंतरों, भरतादि खंडों और
सूर्यादि लोकों, वेदों की शाखाओं तथा वेदव्यास द्वारा उनके
विभाग, सूर्य वंश, चंद्र वंश आदि का वर्णन है । कलि के
राजाओं में मगध के मौर्य राजाओं तथा गुप्तवंश के राजाओं तक
का उल्लेख है । श्रीकृष्ण की लीलाओं का भी वर्णन है पर
बिलकुल उस रूप में नहीं जिस रूप में भागवत में है ।
कुछ लोगों का कहना है कि वायुपुराण ही शिवपुराण है
क्योंकि आजकल जो शिवपुराण नामक पुराण या उपपुराण है
उसकी श्लोक संख्या २४,००० नहीं है, केवल ७,००० ही है ।
वायुपुराण के चार पाद है जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, कल्पों ओर
मन्वंतरों, वैदिक ऋषियों की गाथाओं, दक्ष
प्रजापति की कन्याओं से भिन्न भिन्न जीवोत्पति,
सूर्यवंशी और चंद्रवंशी राजाओं की वंशावली तथा कलि के
राजाओं का प्रायः विष्णुपुराण के अनुसार वर्णन है ।
मत्स्यपुराण में मन्वंतरों और राजवंशावलियों के अतिरिक्त
वर्णश्रम धर्म का बडे़ विस्तार के साथ वर्णन है और
मत्सायवतार की पूरी कथा है । इसमें मय आदिक असुरों के
संहार, मातृलोक, पितृलोक, मूर्ति और मंदिर बनाने
की विधि का वर्णन विशेष ढंग का है ।
श्रीमदभागवत का प्रचार सबसे अधिक है क्योंकि उसमें
भक्ति के माहात्म्य और श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तृत
वर्णन है । नौ स्कंधों के भीतर तो जीवब्रह्म की एकता,
भक्ति का महत्व, सृष्टिलीला, कपिलदेव का जन्म और
अपनी माता के प्रति वैष्णव भावानुसार सांख्यशास्त्र
का उपदेश, मन्वंतर और ऋषिवंशावली, अवतार जिसमें ऋषभदेव
का भी प्रसंग है, ध्रुव, वेणु, पृथु, प्रह्लाद इत्यादि की कथा,
समुद्रमथन आदि अनेक विषय हैं । पर सबसे बड़ा दशम स्कंध है
जिसमें कृष्ण की लीला का विस्तार से वर्णन है । इसी स्कंध के
आधार पर शृंगार और भक्तिरस से पूर्ण कृष्णचरित्
संबंधी संस्कृत और भाषा के अनेक ग्रंथ बने हैं । एकादश स्कंध
में यादवों के नाश और बारहवें में कलियुग के राचाओं के राजत्व
का वर्णन है । भागवत की लेखनशैली और पुराणों से भिन्न है ।
इसकी भाषा पांडित्यपूर्ण और साहित्य संबंधी चमत्कारों से
भरी हुई है, इससे इसकी रचना कुछ पीछे की मानी जाती है ।
अग्निपुराण एक विलक्षण पुराण है जिसमें
राजवंशावलियों तथा संक्षिप्त कथाओं के अतिरिक्त
धर्मशास्त्र, राजनीति, राज- धर्म, प्रजाधर्म, आयुर्वेद,
व्याकरण, रस, अलंकार, शस्त्र- विद्या आदि अनेक विषय हैं ।
इसमें तंत्रदीक्षा का भी विस्तृत प्रकरण है । कलि के राजाओं
की वंशावली विक्रम तक आई है, अवतार प्रसंग भी है ।
इसी प्रकार और पुराणों में भी कथाएँ हैं ।
विष्णुपुराण के अतिरिक्त और पुराण जो आजकल मिलते हैं उनके
विषय में संदेह होता है कि वे असल पुराणों के न मिलने पर पीछे
से न बनाए गए हों । कई एक पुराण तो मत मतांतरों और
संप्रदायों के राग द्वेष से भरे हैं । कोई
किसी देवता की प्रधानता स्थापित करता है, कोई
किसी देवता की प्रधानता स्थापित करता है, कोई किसी की ।
ब्रह्मवैवर्त पुराण का जो परिचय मत्स्यपुराण में दिया गया है
उसके अनुसार उसमें रथंतर कल्प और वराह अवतार
की कथा होनी चाहिए पर जो ब्रह्मवैवर्त आजकल मिलता है
उसमें यह कथा नहीं है । कृष्ण के वृंदावन के रास से जिन
भक्तों की तृप्ति नहीं हुई थी उनके लिये गोलोक में सदा होनेवाले
रास का उसमें वर्णन है । आजकल का यह ब्रह्मवैवर्त
मुसलमानों के आने के कई सौ वर्ष पीछे का है क्योंकि इसमें
'जुलाहा' जाति की उत्पत्ति का भी उल्लेख है—'म्लेच्छात्
कुविंदकन्यायां' जोला जातिर्बभूव ह' (१०, १२१) । ब्रह्मपुराण
में तीर्थों और उनके माहात्म्य का वर्णन बहुत अदिक हैं, अनंत
वासुदेव और पुरुषोत्तम (जगन्नाथ) माहात्म्य तथा और बहुत
से ऐसे तीर्थों के माहात्म्य लिखे गए हैं जो प्राचीन नहीं कहे
जा सकते । 'पुरुषोत्तमप्रासाद' से अवश्य जगन्नाथ जी के
विशाल मंदिर की ओर ही इशारा है जिसे गांगेय वंश के
रिजा चोड़गंगा (सन् १०७७ ई०) ने बनवाया था । मत्स्यपुराण में
दिए हुए लक्षण आजकल के पद्मपुराण में भी पूरे नहीं मिलते हैं ।
वैष्णव सांप्रदायिकों के द्वेष की इसमें बहुत सी बातें हैं । जैसे,
पाषडिलक्षण, मायावादनिंदा, तामसशास्त्र,
पुराणवर्णनइत्यादि । वैशेषिक, न्याय, सांख्य और चार्वाक
तामस शास्त्र कहे गए हैं और यह भी बताया गया है
कि दैत्यों के विनाश के लिये बुद्ध रूपी विष्णु ने असत् बौद्ध
शास्त्र कहा । इसी प्रकार मत्स्य, कूर्म, लिंग, शिव, स्कंद
और अग्नि तामस पुराण कहे गए हैं । सारंश यह कि अधिकांश
पुराणों का वर्तमान रूप हजार वर्ष के भीतर का है । सबके सब
पुराण सांप्रदायिक है, इसमें भी कोई संदेह नहीं है । कई पुराण
(जैसे, विष्णु) बहुत कुछ अपने प्राचीन रूप में मिलते हैं पर उनमें
भी सांप्रदायिकों ने बहुत सी बातें बढ़ा दी hai.
पुराणों का काल एवं रचयिता
यद्यपि आजकल जो पुराण मिलते हैं उनमें से अधिकतर पीछे से
बने हुए या प्रक्षिप्त विषयों से भरे हुए हैं तथापि पुराण बहुत
प्राचीन काल से प्रचलित थे । बृहदारण्यक और शतपथ
ब्राह्मण में लिखा है कि गीली लकड़ी से जैसे धुआँ अलग अलग
निकलता है बैसे ही महान् भूत के निःश्वास से ऋग्वेद, यजुर्वेद
सामवेद, अथर्वांगिरस, इतिहास, पुराणविद्या, उपनिषद,
श्लोक, सूत्र, व्याख्यान और अनुव्याख्यान हुए । छांदोग्य
उपनिषद् में भी लिखा है कि इतिहास पुराण वेदों में पाँचवाँ वेद है
। अत्यंत प्राचीन काल में वेदों के साथ पुराण भी प्रचलित थे
जो यज्ञ आदि के अवसरों पर कहे जाते थे । कई बातें जो पुराण
केलक्षणों में हैं, वेदों में भी हैं । जैसे, पहले असत् था और कुछ
नहीं था यह सर्ग या सृष्टितत्व है; देवासुर संग्राम,
उर्वशी पुरूरवा संवाद इतिहास है । महाभारत के आदि पर्व में (१
। २३३) भी अनेक राजाओं के नाम और कुछ विषय गिनाकर
कहा गया है कि इनके वृत्तांत विद्वान सत्कवियों द्वारा पुराण
में कहे गए हैं । इससे कहा जा सकता है कि महाभारत के
रचनाकाल में भी पुराण थे । मनुस्मृति में भी लिखा है
कि पितृकार्यों में वेद, धर्मशास्त्र, इतिहास, पुराण आदि सुनाने
चाहिए ।
अब प्रश्न यह होता है कि पुराण हैं किसके बनाए । शिवपुराण के
अंतर्गत रेवा माहात्म्य में लिखा है कि अठारहों पुराणों के
वक्ता मत्यवतीसुत व्यास हैं । यही बात जन साधारण में
प्रचलित है । पर मत्स्यपुराण में स्पष्ट लिखा है कि पहले पुराण
एक ही था, उसी से १८ पुराण हुए (५३ । ४) । ब्राह्मांड पुराण में
लिखा है कि वेदव्यास ने एक पुराणसंहिता का संकलन
किया था । इसके आगे की बात का पता विष्णु पुराण से
लगता है । उसमें लिखा है कि व्यास का एक लोमहर्षण नाम
का शिष्य था जो सूति जाति का था । व्यास जी ने अपनी पुराण
संहिता उसी के हाथ में दी । लोमहर्षण के छह शिष्य थे—
सुमति, अग्निवर्चा, मित्रयु, शांशपायन, अकृतव्रण और
सावर्णी । इनमें से अकृत- व्रण, सावर्णी और शांशपायन ने
लोमहर्षण से पढ़ी हुई पुराणसंहिता के आधार पर और एक एक
संहिता बनाई । वेदव्यास ने जिस प्रकार मंत्रों का संग्रहकर उन
का संहिताओं में विभाग किया उसी प्रकार पुराण के नाम से चले
आते हुए वृत्तों का संग्रह कर पुराणसंहिता का संकलन किया ।
उसी एक संहिता को लेकर सुत के चेलों के तीन और संहीताएँ
बनाई । इन्हीं संहिताओं के आधार पर अठारह पुराण बने होंगे ।
मत्स्य, विष्णु, ब्रह्मांड आदि सब पुराणों में ब्रह्मपुराण
पहला कहा गया है । पर जो ब्रह्मपुराण आजकल प्रचलित है वह
कैसा है यह पहले कहा जा चुका है । जो कुछ हो, यह तो ऊपर
लिखे प्रमाण से सिद्ध है कि अठारह पुराण वेदव्यास के बनाए
नहीं हैं । जो पुराण आजकल मिलते हैं उनमें विष्णुपुराण और
ब्रह्मांडपुराण की रचना औरों से प्राचीन जान पड़ती है ।
विष्णुपुराण में 'भविष्य राजवंश' के अंतर्गत गुप्तवंश के राजाओं
तक का उल्लेख है इससे वह प्रकरण ईसा की छठी शताब्दी के
पहले का नहीं हो सकता । जावा के आगे जो बाली टापू है वहाँ के
हिंदुओं के पास ब्रह्मांडपुराण मिला है । इन हिंदुओं के पूर्वज
ईसा की पाँचवी शताब्दी में भारतवर्ष में पूर्व के द्वीपों में जाकर
बसे थे । बालीवाले ब्रह्मा़डपुराण में 'भविष्य राजवंश प्रकरण'
नहीं है उसमें जनमेजय के प्रपौत्र अधिसीमकृष्ण तक का नाम
पाया जाता है । यह बात ध्यान देने की है । इससे प्रकट होता है
कि पुराणों में जो भविष्य राजवंश है वह पीछे से जोड़ा हुआ है ।
यहाँ पर ब्रह्मांडपुराण की जो प्राचीन प्रतियाँ मिलती हैं
देखना चाहिए कि उनमें भूत और वर्तमानकालिक
क्रिया का प्रयोग कहाँ तक है । 'भविष्यराजवंश वर्णन' के पूर्व
उनमें ये श्लोक मिलते हैं— तस्य पुत्रः शतानीको बलबान्
सत्यविक्रमः । ततः सुर्त शतानीकं विप्रास्तमभ्यषेचयन् । ।
पुत्रोश्वमेधदत्तो/?/भूत् शतानीकस्य वीर्यवान् । पुत्रो/?/
श्वमेधदत्ताद्वै जातः परपुरजयः । ।
अधिसीमकृष्णो धर्मात्मा साम्पतोयं महायशाः । यस्मिन्
प्रशासति महीं युष्माभिरिदमाहृतम् । । दुरापं दीर्घसत्रं वै
त्रीणि दर्षाणि पुष्करम् वर्षद्वयं कुरुक्षेत्रे
दृषद्वत्यां द्विजोत्तमाः । । अर्थात्— उनके पुत्र बलवान् और
सत्यविक्रम शतानीक हुए । पीछे शतानीक के पुत्र
को ब्राह्मणों ने अभिषिक्त किया । शतानीक के अश्वमेधदत्त
नाम का एक वीर्यवान् पुत्र उत्पन्न हुआ । अश्वमेधदत्त के
पुत्र परपुरंजय धर्मात्मा अधिसीमकृष्ण हैं । ये
ही महायशा आजकल पृथ्वी का शासन करते हैं । इन्हीं के समय
में आप लोगों ने पुष्कर में तीन वर्ष का और दृषद्वती के किनारे
कुरुक्षेत्र में दो वर्ष तक का यज्ञ किया है । उक्त अंश से
प्रकट है कि आदि ब्रह्मांडपुराण अधिसीमकृष्ण के समय में
बना । इसी प्रकार विष्णुपुराण, मत्स्यपुराण
आदि की परीक्षा करने से पता चलता है कि आदि विष्णुपुराण
परीक्षित के समय में और आदि मत्स्यपुराण जनमेजय के
प्रपौत्र अधिसीमकृष्ण के समय में संकलित हुआ ।
पुराण संहिताओं से अठारह पुराण बहुत प्राचीन काल में ही बन
गए थे इसका पता लगता है । आपस्तंबधर्मसूत्र(२ । २४ । ५)
में भविष्यपुराण का प्रमाण इस प्रकार उदधृत है— आभूत
संप्लवात्ते स्वर्गजितः । पुनः सर्गे
बीजीर्था भवतीति भविष्यत्पुराणे । यह अवश्य है कि आजकल
पुराण अपने आदिम रूप में नहीं मिलते हैं । बहुत से पुराण
तो असल पुराणों के न मिलने पर फिर से नए रचे गए हैं, कुछ में
बहुत सी बातें जोड़ दी गई हैं । प्रायः सब पुराण शैव, वैष्णव
और सौर संप्रदायों में से किसी न किसी के पोषक हैं, इसमें
भी कोई संदेह नहीं । विष्णु, रुद्र, सूर्य आदि की उपासना वैदिक
काल से ही चली आती थी, फिर धीरे धीरे कुछ लोग किसी एक
देवता को प्रधानता देने लगे, कुछ लोग दूसरे को । इस प्रकार
महाभारत के पीछे ही संप्रदायों का सूत्रपात हो चला ।
पुराणसंहिताएँ उसी समय में बनीं । फिर आगे चलकर आदिपुराण
बने जिनका बहुत कुछ अंश आजकल पाए जानेवाले कुछ पुराणों के
भीतर है । पुराणों का उद्देश्य पुराने वृत्तों का संग्रह करना, कुछ
प्राचीन और कुछ कल्पित कथाओं द्वारा उपदेश देना,
देवमहिमा तथा तीर्थमहिमा के वर्णन द्वारा जनसाधारण में
धर्मबुदिध स्थिर रखना दी था । इसी से व्यास ने सूत (भाट
या कथक्केड़) जाति के एक पुरुष को अपनी संकलित
आदिपुराणसंहिता प्रचार करने के लिये दी।
जैन एवं बौद्ध पुराण
हिंदुओं के अनुकरण पर जैन लोगों में भी बहुत से पुराण बने हैं ।
इनमें से २४ पुराण तो तीर्थकरों के नाम पर हैं; और भी बहुत से हैं
जिनमें तीर्थकरों के अलौकिक चरित्र, सब देवताओं से
उनकी श्रेष्ठता, जैनधर्म संबंधी तत्वों का विस्तार से वर्णन,
फलस्तुति, माहात्म्य आदि हैं । अलग पद्मपुराण और हरिवंश
(अरिष्टनेमि पुराण) भी हैं । इन जैन पुराणों में राम, कृष्ण
आदि के चरित्र लेकर खूब विकृत किए गए हैं । बौद्ध ग्रंथों में
कहीं पुराणों का उल्लेख नहीं है पर तिब्बत और नेपाल के बौद्ध ९
पुराण मानते हैं जिन्हें वे नवधर्म कहते हैं —
(१) प्रज्ञापारमिता (न्याय का ग्रंथ कहना चाहिए),
(२) गंडव्यूह,
(३) समाधिराज,
(४) लंकावतार (रावण का मलयागिरि पर जाना, और
शाक्यसिंह के उपदेश से बोधिज्ञान लाभ करना वर्णित है),
(५) तथागतगुह्यक,
(६) सद्धर्मपुंडरीक,
(७) ललितविस्तर (बुद्ध का चरित्र),
(८) सुवर्णप्रभा (लक्ष्मी, सरस्वती,
पृथ्वी आदि की कथा और उनका शाक्यसिंह का पूजन)
(९) दशभूमीश्वर

Source : Sukh-Sagar Saujanya
At bloged : Iamhinduism