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Wednesday, October 16, 2013

टिहरी बाँध परियोजना का विवाद



टिहरी बाँध - Tehri Dam 
यदि टिहरी बाँध बन गया तो (Rajiv Dixit 1995):
बी एस नेगी -टिहरी का असल नाम त्रिहरि है। तीन नदियों का मिलन। यहां पर भागीरथी, भिलंगना और घृत गंगा का संगम था। स्कंदपुराण के केदारखण्ड में इसे गणेश प्रयाग और धनुषतीर्थ कहा गया है। इसे टिरी और बाद में टिहरी नाम दिया गया। टिहरी 1815 में अस्तित्व में आयी। इसे राजा सुदर्शन शाह ने बसाया।

टेहरी विकास परियोजना का एक प्राथमिक बाँध है जो उत्तराखण्ड राज्य के टिहरी में स्थित है। यह बाँधगंगा नदी की प्रमुख सहयोगी नदी भागीरथी पर बनाया गया है। टिहरी बाँध की ऊँचाई २६१ मीटर है जो इसे विश्व का पाँचवा सबसे ऊँचा बाँध बनाती है। इस बाँध से २४०० मेगा वाट विद्युत उत्पादन, २७०,००० हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई और प्रतिदिन १०२.२० करोड़ लीटर पेयजल दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवँ उत्तराखण्ड को उपलब्ध कराना प्रस्तावित है।

हिमालय क्षेत्र में बन रहा टिहरी बाँध शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा हैं। योजना आयोग द्वारा 1972 में टिहरी बाँध परियोजना को मंजूरी दी गई। जैसे ही योजना आयोग ने इस परियोजना को मंजूरी दी, टिहरी और आस-पास के इलाके में बाँध का व्यापक विरोध शुरू हो गया। कई शिकायते इस संबंध में केंद्र सरकार तक पहुंची। संसद की ओर से इन शिकायतों की जांच करने के लिए 1977 में पिटीशन कमेटी निर्धारित की गई। 1980 में इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी ने बाँध से जुड़े पर्यावरण के मुद्दों की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई। इस समिति ने बाँध के विकल्प के रूप में बहती हुई नदी पर छोटे-छोटे बाँध बनाने की सिफ़ारिश की। पर्यावरण मंत्रालय ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर गंभीरता पूर्वक विचार करने के बाद अक्टूबर, 1986 में बाँध परियोजना को एकदम छोड़ देने का फैसला किया।

अचानक नवंबर, 1986 में तत्कालीन सोवियत संघ सरकार ने टिहरी बाँध निर्माण में आर्थिक मदद करने की घोषणा की। इसके बाद फिर से बाँध निर्माण कार्य की सरगर्मी बढ़ने लगी। फिर बाँध से जुड़े मुद्दों पर मंत्रालय की ओर से समिति का गठन हुआ। इस समिति ने बाँध स्थल का दौरा करने के बाद फरवरी, 1990 में रिपोर्ट दी कि टिहरी बाँध परियोजना पर्यावरण के संरक्षण की दृष्टि से बिलकुल अनुचित हैं। मार्च, 1990 में एक उच्च स्तरीय समिति ने बांध की सुरक्षा से जुड़े हुए मुद्दों का अध्ययन किया। जुलाई, 1990 में मंत्रालय ने बांध के निर्माण कार्य को शुरू करने से पूर्व सात शर्तों को पूरा करने के लिए कहा। इन सात शर्तों को पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित की गयी।

लेकिन इस समय सीमा के बीत जाने के बावजूद आज तक एक भी शर्त पूरी नहीं की गई। अब बांध का निर्माण कार्य बिना शर्त पूरा किए शुरू कर दिया गया है। बांध का निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियो को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कई बार याद दिलाया गया, लेकिन बांध निर्माण से जुड़ी हुई कोई भी शर्त नहीं मनी गयी। अगस्त, 1991 में इसी बात को लोकसभा में चेतावनी के रूप में उठाया गया, जिस पर काफी बहस हुई। कई सांसदो ने बांध क्षेत्र में भूकम्प की संभावनाओं पर चिंता व्यक्त की। अक्टूबर, 1991 में उत्तरकाशी में भूकम्प आया, जिससे जान-माल की काफी हानि हुई। इससे यह भी सिद्ध हुआ कि बांध क्षेत्र में भूकम्प की आशंकाए निरधार नहीं हैं।

टिहरी बांध बनाने से 125 गाँव डूबेंगे और 2 लाख से अधिक लोगो को विस्थापित होना पड़ेगा। बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बांध बनने से पेड़-पौधो की 462 प्रजातियाँ लुप्त हो जाएगी। इनमें से 12 प्रजातियाँ अत्यंत दुर्लभ मानी जाती हैं। बांध के बनने से 70 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 20 हजार हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पूरी तरह से डूब जाएगी। 1993 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गये एक नोट में कहा गया है कि यदि यह बांध टूट जाता हैं तो यह विशाल जलाशय 22 मिनट मे खाली हो जाएगा, 63 मिनट में ऋषिकेश 260 मीटर पानी में डूब जाएगा।

अगले बीस मिनट में हरिद्वार 232 मीटर पानी के नीचे होगा। बाढ़ का यह पानी विनाश करते हुए बिजनौर, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर को 12 घंटो में 8.5 मीटर गहरे पानी में डुबो देगा। करोड़ो लोगों के जान-माल का जो नुकसान होगा, वह बांध की लागत से कई गुना अधिक होगा। दूसरा खतरा यह है कि यह बांध चीन की सीमा से लगभग 100 मील की दूरी पर हैं। चीन के साथ किसी संघर्ष में यदि इस बांध को दुश्मनों द्वारा तोड़ दिया जाए तो भी विनाश का यही दृश्य उपस्थित हो सकता हैं जो भूकम्प के आने पर होगा। जल प्रलय की यह भयावह आशंका रूह को कंपा देती हैं। अगस्त, 1975 में चीन के हिनान प्रांत में इसी तरह का बांध टूटा था जिसके जल प्रलय मे 2 लाख 30 हजार लोगों की मौत हुई।


टिहरी बांध के निर्माण में व्याप्त भ्रष्टाचार आंखे खोल देने वाला हैं। 1986 में भारत के महानियंत्रक लेखा परीक्षक श्री टी.एन. चतुर्वेदी द्वारा दी गई रिपोर्ट में बांध के बेतहाशा बढ़ते हुए खर्चे की ओर सरकार का ध्यान दिलाया गया। 1972 में इस परियोजना की लागत 198 करोड़ थी, लेकिन आज यह बढ़कर 8000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुकी हैं। इसका मुख्य कारण मुद्रास्फीति नहीं, बल्कि इसमें होने वाला भ्रष्टाचार हैं। क्योंकि 1972 से 1994 तक मुद्रास्फीति की दर उस रफ्तार से कतई नहीं बढ़ी हैं, जिस रफ्तार से बांध की लागत को बढ़ाया गया हैं श्री टी.एन. चतुर्वेदी जी ने स्पष्ट कहा था कि, “यह बांध परियोजना घाटे का सौदा हैं। ”

हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र काफी कच्चा हैं। इसलिए गंगा में बहने वाले जल में मिट्टी की मात्रा अधिक होती हैं देश की सभी नदियों से अधिक मिट्टी गंगा जल में रहती हैं। अत: जब गंगा के पानी को जलाशय मे रोका जाएगा तो उसमें गाद भरने की दर देश के किसी भी अन्य बांध में गाद भरने की दर से अधिक होगी। दूसरी ओर, टिहरी में जिस स्थान पर जलाशय बनेगा वहाँ के आस-पास का पहाड़ भी अत्यंत कच्चा हैं। जलाशय में पानी भर जाने पर पहाड़ की मिट्टी कटकर जलाशय में भरेगी। अर्थात गंगा द्वारा गंगोत्री से बहाकर लायी गयी मिट्टी तथा जलाशय के आजू-बाजू के पहाड़ से कटकर आयी मिट्टी दोनों मिलकर साथ-साथ जलाशय को भरेंगे। गाद भरने की दर के अनुमान के मुताबिक टिहरी बांध की अधिकतम उम्र 40 वर्ष ही आँकी गई हैं। अत: 40 वर्षो के अल्प लाभ के लिए करोड़ों लोगों के सिर पर हमेशा मौत की तलवार लटकाए रखना लाखों लोगों को घर-बार छुड़ाकर विस्थापित कर देना एवं भागीरथी और भिलंगना की सुरम्य घाटियो को नष्ट कर देना पूरी तरह आत्मघाती होगा।

टिहरी बांध से होने वाले विनाश में एक महत्वपूर्ण पहलू गंगा का भी हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गंगा के बहते हुए जल में ही श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक कार्य हो सकते है लेकिन बांध बन जाने से गंगा का प्रवाह जलाशय में कैद हो जाएगा हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गंगा का जल जितनी तेज गति से बहता है उतना ही शुद्ध होता हैं। यही गतिमान जल गंगा में बाहर से डाली गई गंदगी को बहाकर ले जाता हैं। गंगा भारत की पवित्रतम् नदी तो हैं ही, हमारी सभ्यता-संस्कृति की जननी भी हैं। प्रत्येक भारतवासी के मन में गंगा में एक डुबकी लगाने या जीवन के अंतिम क्षणों में गंगा जल की एक बूंद को कंठ से उतारने की ललक रहती हैं। जब भी कोई भारतवासी किसी अन्य नदी में स्नान करता हैं तो सर्वप्रथम वह गंगा का स्मरण करता हैं। यदि वह गंगा से दूर रहता हैं तो मन में सदैव गंगा में स्नान करने की इच्छा रखता हैं। जब वह अपने मंतव्य में सफल हो जाता हैं तो गंगा के परम पवित्र जल में स्नान करने के पश्चात अपने साथ गंगा जल ले जाना नहीं भूलता और घर जाकर उसे सुरक्षित स्थान पर रख देता हैं। जब भी घर में कोई धार्मिक अनुष्ठान हो तो इसी गंगा जल का प्रयोग होता हैं।

राष्ट्र की एकता और अखंडता में गंगा का बहुत महत्वपूर्ण योगदान हैं। शास्त्रों के अनुसार गंगोत्री से गंगा जल ले जाकर गंगा सागर में चढ़ाया जाता हैं और फिर गंगा सागर का बालू लाकर गंगोत्री में डाला जाता हैं। इस पूरी प्रक्रिया में व्यक्ति को गंगोत्री से गंगासागर और फिर गंगासागर से गंगोत्री तक की यात्रा करनी होती हैं। देश के एक सिरे से दूसरे सिरे तक की यह यात्रा ही राष्ट्रीय एकता के उस ताने-बाने को बुनती हैं जिसमें देश की धरोहर बुनी हुई हैं। गंगा हमारे राष्ट्र की जीवनधारा हैं और इसे रोकना राष्ट्र के जीवन को रोकने जैसा हैं। 1914-16 में स्व. पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने अंग्रेज़ो द्वारा भीमगौड़ा में बनाए जाने वाले बांध के खिलाफ आंदोलन किया था। इस आंदोलन से पैदा हुए जन आक्रोश के कारण बाँध बनाने का फैसला रद्द कर दिया था। मालवीय जी ने अपनी मृत्यु से पूर्व श्री शिवनाथ काटजू को लिखे पत्र में कहा था कि “गंगा को बचाए रखना।”



 - राजीव दीक्षित 

Sunday, October 13, 2013

America Wants To Destroy RAM SETU and his agent Manmohan Singh Helping him exposed By Rajiv Dixit

america want to destoyed ram setu

America Wants To Destroy (RAM SETU) and his agent Manmohan Singh Helping him exposed By Rajiv Dixit

it seems that manmohan is pure american agent not i'm saying but its proved. Think about that India is following every policy and rules of america but america not. In 1991 manmohan destroyed our economic structure by following globalization. You can't imaging that what it make see my before post on Economics and globalization effect .do you ever notice that before 1991 dollar price to rupees was $1 = 18 and now its $1 =  65 , wow what a reform ! till 2013 about 6000 foreign company entered and our domestic company collapse.Let me come to main topic on Ram seTu.    

श्री राम जी की सबसे बड़ी निशानी ''रामसेतु'' तुड़वाना चाहती है सरकार !! 
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दोस्तो आपको याद होगा 1998 मे जब भारत ने परमाणु बोम्ब ब्लास्ट किया था तो अमेरिका को हमसे बहुत आग लगी !

और अमेरिका ने भारत को परमाणु बंब बनाने के लिए यूरेनियम देना बंद कर दिया था,

इसके इलवा अमेरिका ने भारत की कंपनियों को अमेरिका मे घुसने पर रोक लगाई !

फिर अचानक अमेरिका के दिल में इतनी दया कैसे आई ???
कि वो आज भारत को यूरेनियम देने के लिए तैयार हो गया !

इसकी शुरुआत तब होती है, जब पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जोर्ज बुश भारत आये थे और एक सिविल न्यूक्लीयर डील पर हस्ताक्षर किये गए जिसके अनुसार अमरीका भारत को युरेनियम-235 देने की बात कही l उस समय पूरी मीडिया ने मनमोहन सिंह की तारीफों के पुल बांधे और इस डील को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, पर पीछे की कहानी छुपा ली गयी l

असल बात कुछ और है और वो बात बहुत गहरी है | भारत के वैज्ञानिक पिछले कई वर्षो से ये खोजने में लगे हुए है के यूरेनियम के अतिरिक्त और कोन सा हमारे पास रेडियो एक्टिव इंधन है जिससे हम बोम्ब बना सके या बिजली भी बना सके |

Atomic Energy Commission के 6000 वैज्ञानिक पिछले 40 सालो से इसी काम में लगे हुए है | उनको पता चला के भारत के तमिलनाडु , केरल का जो समुद्री एरिया है उहाँ पर बहुत बड़ी मात्रा में ऐसा रेडियो एक्टिव इंधन है जिससे अगले 150 साल तक बिजली बनायीं जा सकती है और दुसरे देशो से भीख मांगने की भी जरुरत नही होगी |

डॉ कालाम का कहना था के 3 लाख Mega-watt बिजली हर घंटे अगले 240 साल तक बना सकते है | और ये बात अब्दुल कलाम जी ने रीटायर होने के बाद अपने पहले interview मे कही थी !

अब अमेरिका की नज़र हमारे उस इंधन पे है और वो चाहता है भारत उस इंधन को अमेरिका को दे और बदले में अमेरिका थोडा बहुत यूरेनियम हमको दे |

इस खेल को पूरा करने के लिए अमेरिका श्री राम सेतु को तोड़ना चाहता है ! और इस काम को पूरा करने के लिए अमेरिकी एजेंट मनमोहन सिंह जो पिछले 20 साल से भारत सरकार मे बैठा है !!

सुप्रीम कोर्ट मे भी case चल रहा है ! अभी date पर date पर रही है ! वहाँ केंद्र सरकार कॉंग्रेस और मनमोहन सिंह तर्क देते है !! कि ये सेतु श्री राम नहीं बनाया ! श्री राम तो एक कल्पना है ! श्री राम तो कभी हुए ही नहीं !!

जबकि कुछ साल अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी NASA ने ही रामसेतु की पुष्टि अपनी रिपोर्ट में की है l ! आज भी आपको वहाँ ऐसे पत्थर मिल जाएँगे ! जिस पर राम लिखा है और वो पानी मे तैरते है !!
http://www.youtube.com/watch?v=6vL2imvw4FA

सिखो के धार्मिक ग्रंथ (श्री गुरु ग्रंथ साहिब )मे 55000 से ज्यादा बार श्री राम का नाम आता है ! और ये अमरेकी agent मनमोहन सिंह ऐसे गंदी हरकत कर अपने धर्म पर भी कलंक है !!

दोस्तो क्या आप जानते है श्री राजीव दीक्षित जी ने 1997 मे ही इस मनमोहन singh को अमरीका का agent घोषित कर दिया था ! और ऐसा कहा था ! 101% ये मनमोहन सिंह america का agent है जो भारत सरकार मे बैठा है !!

आप यहाँ click कर सिर्फ पहले 40 min ध्यान से सुने और समझे राजीव दीक्षित जी का 1997 का lecture !!!

http://www.youtube.com/watch?v=kfwWyWsADhs&feature=plcp

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और अगर आपको ऊपर लिखी (श्री राम सेतु) को तोड़ने की बाते कोई मज़ाक लग रही है !!

तो एक बार यहाँ जरूर जरूर click करे !

http://www.youtube.com/watch?v=6vL2imvw4FA

Share Maximum With Other And Please Save Ram Setu.
Sources : 

Nestle Maggi its Non-vage and Dangerous for Health

Non-Vage Nastle Atta Maggi Exposed

DO NOT IGNORE THIS INFORMATION, especially those who are fond of Maggi...give ur 2 min to read n share these 7 horrible facts about Maggi
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Many of us can't live without " Maggi " especially when one is away from home, in a foreign land. Here is a piece of information to share so that we can remove the potential health hazard of consuming Maggi. Maybe you should print this to keep as a reminder, pin it up in the kitchen. 


1. Atta Maggie contains? DSG (DiSodium Glutamate), which does contain Bacto soytone. Not written in ingredients as such, hidden under alias Flavor-627. using Bactosoytone, itself made from soy protein using a catalyst enzyme porcine (taken from intestine of Pig).
Also Read My Before Post about Maggi Exposed By Rajiv dixit

2. The current cooking instruction printed on instant noodles label is wrong.
Normally, the way we cook the instant noodles is to put the noodles into a pot with water, throw in the powder and let it cook for around 3 minutes and then it’s ready to eat. (WRONG!)

3. Nestlé have faced criticism over their advertising of the Maggi brand, adhering to marketing regulations in developed countries, but making misleading claims in developing countries where regulation permits it.

4. The dry and crunchy noodles contains wax. It contains wax – able to stay inside body for 4 to 5 days.

5. The advert made false claims that the noodles would “help to build strong muscles, bone and hair”. The British Advertising Standards Authority said that the advert did not abide by the new EU consumer protection legislation, by which advertisers have to provide proof of health claims.

6. One serving (1 block or 100 grams) of noodles contains 1170 mg. of sodium aka salt n all we know SALT is responsible for increase in Blood Pressure and heart patients all over the world.

7. Boiling the separately packaged flavors in water changes the MSG (Monosodium glutamate) to toxic form - 'Silent damage' to the brain...also linked to asthma attacks, cause disabling arthritis, and even serious depressions, behavioral problems in children....
MSG has been found to be more toxic than all other food toxins, poisons and allergens.!!!

In Bad Taste: The MSG Symptom Complex

Maggi is Non Veg - - -try this experiment at home

Boil chicken maggi soup powder and vegetarian maggi noodles masala powder

After boiling, taste both of them....they will taste the same...all the best
Also Read My Earlier Post About Maggi Is Non-Vage 

Think about it...

Sunday, September 29, 2013

Swadeshi Vs Videshi - Best Way To Improve Indian Economy ( Classification Company By Country )


मित्रो राजीव भाई की स्वदेशी की परिभाषा बहुत ही सरल है ! राजीव भाई का स्वदेशी आपके घर,मुहल्ले ,नगर ,शहर मे आपके सबसे करीब आपके किसी मित्र ,भाई नगरवासी आदि द्वारा बनाया गया सामान है !!राजीव भाई का स्वदेशी वो है जो किसी गरीब को रोजगार दे ! जो गाँव ,जमीन ,किसान आदि से जुड़ा हो ! उसी को सामान को प्राथमिकता देनी चाहिए !!

उदाहरण के लिए राजीव भाई का स्वदेशी हमेशा नीम,बबूल ,आम ,अमरूद आदि का दातुन होगा किसी कंपनी का टूथपेस्ट नहीं ! हमे दातुन को प्राथमिकता देनी चाहिए ! कोई मजबूरी हो तो कंपनी का टूथपेस्ट इस्तेमाल करना चाहिए ! लेकिन वहाँ टूथपेस्ट भारतीय कंपनी का होना चाहिए !!

दूसरा उदाहरण ! राजीव भाई का स्वदेशी हमेशा गन्ने ,शिर्डी ,मोसमी ,संतरा आदि का रस होगा जो कोई गरीब आपके घर के आस -पास बेच रहा है ! डाबर का real जूस नहीं !!
हमे गन्ने ,शिर्डी ,मोसमी ,संतरा आदि का रस होगा जो कोई गरीब आपके घर के आस -पास बेच रहा है उसे प्राथमिकता देनी चाहिए !! लेकिन कोई मजबूरी हो तो कंपनी आदि का जूस पीना चाहिए ! लेकिन कंपनी स्वदेशी हो !!

खैर ये कुछ भारतीय कंपनियो के सामानो की सूची है जो आप देश सकते है लेकिन कोशिश करे जो सम्पूर्ण स्वदेशी है उसे प्राथमिकता दें !
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1) Cold drinks

विदेशी ---------
Coca Cola(Coke, Fanta, Sprite, Thumbsup, Limca, Goldpat), Pepsi(Lehar, 7up, Mirinda, Slice)

स्वदेशी
Rose Drink(Sherbat), Badam Drink, Milk, Lassi, Curd, yoghurt, Chaach, Juice, Lemonade(Nimbu Paani), Coconut Water(Naariyal Paani), Shakes, Jaljeera, Thandai, Roohafza, Rasna, Frooti, Godrej Jumpin, etc
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2). Tea & coffee

विदेशी -
Lipton(Tiger, Green Label, Yellow Label, Cheers), BrookBond(Red Label, Taj Mahal), Godfrey Philips, Polsan, Goodrick, Sunrise, Nestle, Nescafe

स्वदेशी -
Divya Peya(Patanjali), Tata, Brahmaputra, Aasam, Girnaar, Indian Cafe, M.R.
Foreign- Nestle(Lactogen, Cerelac, Nestam, L.P.F, Milkmaid, Eaveryday, Galtco), GlaksoSmithCline(Farex)
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3) Child food & milk powder

स्वदेशी -
Honey, Boiled rice, Fruit Juice. Amul, Sagar, Tapan, Milk Care, etc.
Most ice-creams have animal intestinal extracts.

विदेशी -
Walls, Quality, Cadbury, Dolps, Baskin & Robins.nestle everyday
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4) ice cream

स्वदेशी -
Homemade icecream/coolfi, Amul, Vadilal, Milk food, etc.

विदेशी -
Annapurna, Captain Cook(HUL- Hindustan Unilever), Kisan(Brookbond), Pilsbury.
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5) नमक (salt)

स्वदेशी - Ankur, Saindha namak(Patanjali), Low Sodium & Iron-45 Ankur, Tata, Surya, Taja, Tara.

विदेशी - Uncle, Pepsi(Ruffle, Hastes), FunMunch, etc
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6)Potato chips & snacks

स्वदेशी
- Bikano Namkeen, Haldiram, Homemade chips, Bikaji, AOne, etc

विदेशी
lays ,uncle chips ,kurkure ,bingo, Nestle, BrookBond (Kisaan), Brown and Palson

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7) Tomato ketchup & fruit jam

स्वदेशी
Patanjali(Fruit jam, Apple jam, Mix jam), Homemade sauce/ketchup, Indana, Priya, Rasna.
Most choclates have Arsenic(Poison).

विदेशी -
kisan, Cadbury(Bournvita, 5Star), Lipton, Horlicks, Nutrine, Eclairs.
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Biscuit & chocolates

स्वदेशी -
Patanjali(Amla Candy, Bel Candy, Aarogya biscuit), Parle, Indana, Amul, Ravalgaon, Bakemens, Creamica, Shagrila.

विदेशी
ITC sunfeast ,Cadbury,britania !
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9)Water (पानी)

विदेशी - Aquafina, Kinley, Beiley, Pure life, Ivian.

स्वदेशी - Home-boiled pure water, Ganga, Himalaya, Rail neer, Bisleri.

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10) Health tonics
विदेशी -
Boost, Polson, Bournvita, Horlicks, Complan, Spurt, Proteinex.

स्वदेशी
Patanjali(Badam Pak, Chyawanprash, Amrit Rasayan, Nutramul)
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11) Ghee & edible oil

विदेशी -
dalda ,fortune ,safola Nestle, ITC, Hindustan Uniliver(HUL)

स्वदेशी -
Param Ghee, Amul, Handmade cow ghee, Patanjali(Sarso ka tel).
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12) . Toothpaste/Powder
विदेशी
Most toothpastes are made from Animal bone powder. Colgate, Hindustan Uniliver(HUL)(Closeup, Pepsodent, Cibaca), Aquafresh, Amway, Quantum, Oral-B, Forhans.

स्वदेशी
- Patanjali(Dant Kanti, Dant Manjan), Vico Bajradanti, MDH, Baidyanath, Gurukul Pharmacy, Choice, Neem, Anchor, Meswak, Babool, Promise.
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13) Toothbrush

विदेशी
Colgate, Closeup, Pepsodent, Oral-B, Aquafresh, Cibaca

स्वदेशी
- Ajay, Promise, Ajanta, Royal, Classic, Dr. Strock, Monate.
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14) Bathing soap

विदेशी
- Hindustan Unilever(HUL)(Lux, Liril, Lifebuoy, Denim, Dove, Revlon, Pears, Rexona, Bridge, Hamam, Okay), Ponds, Detol, Clearsil, Palmolive, Amway, Johnson Baby, Vivel(ITC).

स्वदेशी
Patanjali(Kayakanti, Kayakanti Aloevera), Nirma, Medimix, Neem, Nima, Jasmine, Mysore Sandal, Kutir, Sahara, Himani Glyscerene, Godrej(Cinthol, Fairglo, Shikakayi, Ganga), Wipro, Santoor.
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15) Shampoo

विदेशी
Colgate, Palmolive, HUL(Lux, Clinic, Sunsilk, Revlon, Lakme), Proctar & Gamble(Pantent, Medicare), Ponds, Old Spice, Shower to Shower, Head & Shoulders, Johnson Baby, Vivel.

स्वदेशी
Patanjali(Kesh Kanti), Wipro, Park Avenue, Swatik, Ayur Herbal, Kesh Nikhar, Hair & Care, Arnica, Velvet, Dabur Vatika, Bajaj, Nyle, Lavender, Godrej.
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16). Washing soap, powder, neel

विदेशी
HUL(Surf, Rin, Sunlight, Wheel, Okay, Vim), Arial, Check, Henko, Quantum, Amway, Rivil, Woolwash, Robin Blue, Tinapal, Skylark

स्वदेशी
Tata Shudh, Nima, Care, Sahara, Swastik, Vimal, Hipolin, Fena, Sasa, TSeries, Dr. Det, Ghadi, Genteel, Ujala, Ranipal, Nirma, Chamko, Dip

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17 )Shaving cream

विदेशी
Old Spice, Palmolive, Ponds, Gillete, Denim. Nivea

स्वदेशी
Park Avenue, Premium, Emami, Balsara, Godrej,.

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18) Shaving blade

विदेशी
Gillete, 70clock, Wilman, Wiltage.

स्वदेशी
Topaz, Gallant, Supermax, Laser, Esquire, Silver Prince, Premium.
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19) Cream, powder, cosmetic products

विदेशी
- HUL(Fair & Lovely, Lakme, Liril, Denim, Revelon), Proctar & Gamble(Clearsil, Cleartone), Ponds, Old Spice, Detol, Charli, Johnson Baby.

स्वदेशी
Patanjali(KayaKanti, KayaKanti Aloevera, Kantilep) Neem, Borosil, Ayur Emami, Vico, Boroplus, Boroline, Himani Gold, Nyle, Lavender, Hair & Care, Heavens, Cinthol, Glory, Velvet(Baby).
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20) Readymade garments

विदेशी
Rangler, Nike, Duke, Adidas, Newport, Puma, Reebok

स्वदेशी
Cambridge, Park Avenue, Bombay Dyeing, Ruf & Tuf, Trigger Jeans.
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21) Watches/clocks

विदेशी
Baume&Mercier, Bvigari, Chopard, Dior, FranckMuller, Gizard-Perregaux, Hublot, JaquetDroz, LeonHatot, Liadro, Longines, MontBlanc, Mocado, Piaget, Rado, Raymond Weil, Swarovski, TagHeuer, Ulysse Nardin, Vertu, Swatch, Rolex, Swissco, Seeko

स्वदेशी
Titan, HMT, Maxima, Prestige, Ajanta.
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22) Stationery

विदेशी
- Parker, Nickleson, Rotomac, Swissair, Add Gel, Ryder, Mitsubishi, Flair, Uniball, Pilot, Rolgo

स्वदेशी
Camel, Kingson, Sharp, Cello, Natraj, Ambassador, Linc, Montex, Steek, Sangita, Luxor.
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23) Electronics

विदेशी
Samsung, LG, Sony, Hitachi, Haier.

स्वदेशी
Voltas, Videocon, BPL, Onida, Orpat, Oscar, Salora, ET&T, T-series, Nelco, Weston, Uptron, Keltron, Cosmic, TVS, Godrej, Brown, Bajaj, Usha, Polar, Anchor, Surya, Oriont, Cinni, Tullu, Crompton, Loyds, Blue Star, Voltas, Cool home, Khaitan, Everready, Geep, Novino, Nirlep, Elite, Jayco, Titan, Ajanta, HMT, Maxima, Alwin watch, Ghari, Bengal, Maysoor, Hawkins, Prestige pressure cooker and products of small scale and cottage industries.
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24) Computers

विदेशी -
HP, Compaq, Dell, Microsoft.

स्वदेशी
Amar PC, Chirag, HCL.
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25 ) Cars

विदेशी
MarutiSuzuki, Hyundai, Chevrolet, Ford , Nissan

स्वदेशी - TATA, Mahindra, Hindustan Motors tvs
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26 ) fast food

विदेशी
pizza hut, macdonald,KFC

स्वदेशी
रेहड़ी वाले भाई की पानी पूरी, चाट टिकी, चने भटूरे, गोलगपे, नान, समोसे,दही वाड़ा आदि आदि !!
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मित्रो देश केवल भारत माता के जयकारे लगाने से नहीं बचेगा ! डूबती अर्थ व्यवस्था (ECONOMY) को बचाने के लिए आप अधिक से अधिक अपने देश की कंपनियो का समान खरीदे !! ताकि देश का पैसा देश मे रहे !! Technology से बनी वस्तुओ मे आपकी कोई मजबूरी हो सकती है !! लेकिन कम से कम बिना technology की बनी वस्तुए तो आप अपने देश की कंपनियो की खरीद ही सकते हैं ?

आजादी से पहले हमारे देश के क्रांतिकारी विदेशी सामानो की होली जलाया करते थे !! और आज हमने अपना पूरा घर विदेशी सामानो से भर लिया है !! हम सब नाम के भारतीय रह गये है !!
आज हम विदेशी भाषा बोलने ,विदेशी गीत सुनने, विदेशी जूता चप्पल कपड़े, पहने विदेशी खाने पर गर्व करने लगे हैं !!

क्या ये शहीदो के सपनों का भारत है ???
क्या हमारे शहीदो ने ऐसे भारत का सपना देखा था ?? जहां देश के लोग विदेशी माल हर विदेशी चीज पर गर्व करेंगे ??? !!!

मित्रो भारतीय बनो भारतीयता अपना आओ !!

स्वदेशी का अर्थ के विदेशी वस्तुओ का बहिष्कार करना नहीं है !!
स्वदेशी से अर्थ हर भारतीय वस्तु पर गर्व करना है !!!!

भारतीय भाषा का सम्मान करना है !

भारतीय वेश भूषा का सम्मान करना है !!

भारतीय संस्कृति का सम्मान करना है !

भारतीय खेलो का सम्मान करना है !!

भारतीय संगीत का सम्मान करना है !!

भारतीय धर्म संसकारो का सम्मान करना है !!

भारतीय त्योहारो का सम्मान करना है !!

भारतीय चिकित्सा का सम्मान करना है !!

मतलब हर वो चीज जो अपने भारत से जुड़ी है ! उसका सम्मान करना है !!

शायद आप कहे globalization के जमाने मे हम कैसे बाते कर रहे है !!???
तो ये सवाल पूछने से पहले आप एक बार नीचे दिये गए link पर click करे !!
जवाब आपको आप मिल जाएगा !!
http://www.youtube.com/watch?v=ZsDzKUSspOQ&amp%3Bfeature=plcp

65 से साल से झूठे तर्क देकर सरकार विदेशी कंपनियों को भारत बुला रही हैं| और आज हालत यह हो गई है कि 5000 से ज्यादा विदेशी कंपनिया भारत में घुस चुकी हैं ।

जब कि इतिहास इस बात का गवा है। कि गल्ती से हमने एक ईस्ट इंडिया कंपनी को बुला लिया था और 250 के लिये अपनी आजादी गवा बैठे थे ।

फ़िर आजादी पाने के लिये
(भगत,सिहं उधम सिहं , सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय, विपिन चंद्र पाल,नाना सहिब पेश्व,) और ऐसे 7 लाख 32 हजार क्रतिंकरियो को अपना बलिदान देना पड़ा तब जाकरआजादी मिली ।

लेकिन आज तो 5000 विदेशी कंपनिया हो गई हैं । क्या ये हमारे देश कि आजादी के
लिये दुबारा खतरा नहीं है ??

जब ये सवाल भारत सरकार से पूछा जाता हैं तो भारत सरकार विदेशी कंपनियों को भारत में
बुलाने के लिये 4 तर्क देती हैं.

1)विदेशी कंपनिया आती हैं तो पूंजी लाती है।

2) विदेशी कंपनिया आती हैं तो technology लाती हैं !

3) विदेशी कंपनिया आती है तो export बढ़ाती है ।

4) विदेशी कंपनिया आती है तो हमारे देश के लोगो को रोजगार देती रोजगार बढ़ती हैं !!

मित्रो हो सकता है आपके दिमाग में भी यही तर्क हो !!

लेकिन सरकार के अपने आंकड़े ही सरकार की poll खोलते हैं ! ये 4 तर्क कितने झूठे हैं उनका पुरा खुलासा राजीव दिक्षित जी ने पुरे दस्तावेजो और सबूतो के साथ इस विडियो में किया हैं । ये इतनी बड़ी लूट है जो 65 सालो से देश में चल रही है !! और इस पर हर राजनीतिक पार्टी शांत है !

मित्रो ये एक ऐसा videos है ! जो देश के पढ़े लिखे लोगो का दिमाग घूमा कर रख देगा !!
ऐसा जानकारी न उन्हे कोई रजीनीतिक पार्टी देगी ! न ही मीडिया !! और न ही किसी किताब में मिलेगी

ये videos अगर हर भारतीय को दिखा दिया जाए !! तो पूरे देश में ऐसे आर्थिक क्रांति होगी ! जो भारत को विश्व गुरु बना देगी !!

कृपया पूरा video ही देखें ! अगर आपके पास अभी समय न हो तो link save कर ले ! और बाद में जरूर देखें !! पर पूरा विडियो ही देखें !!

वन्देमातरम !!
यहाँ जरूर click करे

http://www.youtube.com/watch?v=b9N-G3aovL8

वन्देमातरम !!वन्देमातरम !!वन्देमातरम !!

Cheap And The best homeopathic treatment of Chikungunya



श्री राजीव दीक्षित जी ने 6 महीने गाँव -गाँव घूम-घूम कर आयुर्वेदिक दवा से सैंकड़ों लोगो को बचाया !!और ये दवा बनानी कितनी आसान है !

तुलसी का काढ़ा पी लो !

नीम की गिलोय होती है उसको भी उसमे डाल लो !


थोड़ी सोंठ(सुखी अदरक) डाल लो !

थोड़ी छोटी पीपर डाल लो !

और अंत थोड़ा गुड मिला लो ! क्यूंकि ज्यादा कड़वा हो जाता है तो कई बार पिया नहीं जाता !

मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव भाई ने हजारो लोगो का चिकनगुनिया पूरा खत्म कर दिया !!
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और जो ये एलोपेथी वाले ने किया ! Boveron के 3 -3 इंजेक्शन ठोक दो ! diclofenac दे दो !
Paracetamol भी दे दो ! जो इनके पास है सब मरीज को ठोक दिया ! और लोग 20 -20 दिन से बिस्तर मे पड़े तड़पते रहे !!

और कुछ डाक्टर जिनको खुद चिकनगुनिया हो गया ! राजीव भाई के पास आए और बोलो कुछ बता दो ! राजीव भाई ने कहा अपना इंजेक्शन खुद क्यूँ नहीं ठोक लेते ! तो उन्होने ने कहा हमे मालूम है इसके side effects क्या हैं !

तो राजीव भाई ने कहा मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???
क्या इतने हरामखोर हो ??

तुम जानते हो Boveron लगाएंगे मुंह मे छाले हो जाएँगे ! गले मे छालें हो जाएँगे ! अल्सर होने की भी संभावना है ! ये सब तुम जानते हो तो मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???

ये हरामखोरी तुम मे कहाँ से आ गई ??

अपने को ये सब इंजेक्शन लगाओ नहीं ! और मरीज को ठोकते जाओ ठोकते जाओ ! और तुमके मालूम है मरीज इससे ठीक होने वाला नहीं ! फिर Paracetamol दे दो फिर novalgin दे दो !

और दुर्भाग्य से ये सारी दवाएं यूरोप के देशों मे पीछले 20 -20 से बंद है ! वो कहते है diclofenac खराब है !Paracetamol तो जहर है ! novaljin तो 1984 से बैन हैं अमेरिका मे ! और वही इंजेक्शन ठोक रहें बार बार ! और मरीज जो है ठीक ही नहीं हो रहा !!

राजीव भाई बताते है होमेओपेथी की तो बहुत सी दवा तो आयुर्वेद से हीं गाई ! आप मे से कुछ होमेओपेथी डाक्टर होंगे तो वो जानते होंगे ! तुलसी से ही ocimum बनी हैं ! तो ocimum की तीन तीन खुराक देकर राजीव भाई ने कर्नाटक राज्य मे 70 हजार लोगो को चलता कर दिया ! और वो 20 -20 दिन से एलोपेथी खा रहे थे result नहीं आ रहा था ! बुखार रुक नहीं रहा था उल्टी पे उल्टी हो रही थी ! नींद आ नहीं रही थी और ocimum 200 की तीन तीन खुराक से
सब ठीक कर दिया !

और अंत कर्नाटक राज्य की सरकार ने इसके परिणाम देख अपने सारे डाएरेक्टर,जोयन डेरेक्टर ! लगा दिये कि जाओ देखो ये राजीव दीक्षित क्या दे रहा है !

राजीव भाई 70 हजार लोगो को दवा दी सिर्फ 6 मरे ! औए उन्होने 1 लाख 22 हजार लोगो की दी मुश्किल से 6 बचे !! ये कर्नाटक का हाल था ! राजीव भाई बोले मेरी मजबूरी ये थी की कार्यकर्ता कम पढ़ गए ! अगर 1 -2 हजार डाक्टरों की टीम साथ होती ! तो हम कर्नाटक के उन लाखो लोगो को बचा लेते जो मर गए !

तो मित्रो ये तुलसी ,नीम सोंठ ,पीपर सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं ! इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं ! और अगर पूरे शहर या गाँव मे फैल जाये ! एक एक को काढ़ा पिलाना मुश्किल हो तो होमेओपेथी की ocimum 200 की दो दो बुँदे 3 -3 बार मरीजो को दीजिये !!
उनका अनमोल जीवन और पैसा बचाइए !

अपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !

एक बार यहाँ जरूर click कर देखे !

https://www.youtube.com/watch?v=PmQnBJbq5X8

वन्देमातरम ! अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !

Friday, September 27, 2013

Vicks vaporub Is Poison - Why Vicks vaporub Banned in Other Country


सावधान !
VICKS नाम की दवा का पूरा सच जरूर पढ़ें !

मित्रो भारत मे एक विदेशी कंपनी हैं procter and gamble ( P&G ) ! जो भारत मे vicks vaporub नाम की एक दवा बेचती है ! क्या आप जानते हैं VICKS नाम की दावा अमेरिका में बनाना और बेचना दोनों जुर्म है,
WHO (world health organisation ) ने खुद इसे जहर घोषित किया है !

आप google पर भी "vicks vaporub banned " लिख कर search कर सकते हैं ! अमेरिका मे अगर किसी डॉक्टर ने किसी को VICKS vaporub की prescription लिख दे तो उस डॉक्टर को 14 साल की जेल हो जाती है, उसकी डिग्री छीन ली जाती है |

क्यूंकि की vicks vaporub जहर है, ये आपको दमा, अस्थमा, ब्रोंकिअल अस्थमा कर सकता है | इसीलिए दुनिया भर में WHO और वैज्ञानिको ने इसे जहर घोषित किया | और ये जहर भारत में सबसे ज्यादा बिकता है विज्ञापनो की मदद से |

लेकिन क्या आप जानते हैं ?? भारत मे एक कानून है ? उस कानून के अनुसार किसी भी दवा का विज्ञापन टीवी,अखबार, या किसी भी मैगजीन पे नही दिया जा सकता ! लेकिन इसके बावजूद भी पैसे के ताकत से, घूसख़ोरी से ये सब होता है ! और द्वाईयों के विज्ञापन लगातार टीवी, अखबारों आदि मे दिखाये जाते हैं !

और ये vicks vaporub नाम की दवा कितनी महंगी आपको बेची जाती है !

25 ग्राम 40 रूपये की है
तो 50 ग्राम 80 रूपये की
तो 100 ग्राम 160 रूपये की

मतलब 1 किलो vicks की 1600 रूपये हुई ! 1600 रूपये किलो का जहर खरीद आप खुद लगा रहे हैं और अपने बच्चों को लगा रहे हैं ! जिससे आपको दमा, अस्थमा, ब्रोंकिअल अस्थमा TB हो सकता है !!

सर्दी खांसी की आयुर्वेद मे बहुत अच्छी दवा है उसका नाम है ! दालचीनी (ध्यान रहे ये दालचीनी आम घरो मे होने वाली आम दाल और चीनी नहीं है ) ज्यादा न पता हो तो google पर "दालचीनी" लिख photo देख लें ! इस दालचीनी को पीस ले और एक चम्मच शहद के ऊपर कुछ चुटकी डाले और सीधा निगल जाएँ बहुत ही ज्यादा लाभकारी हैं ! अगर किसी को गले मे ज्यादा दर्द हो या tonsils की समस्या हो ! तो आप एक चुटकी शुद्ध हल्दी बिलकुल गले मे घंटी की पास रखे ! मात्र 3 दिन करने से आपको बहुत अधिक लाभ होगा !!

इस vicks नाम के जहर को घर से बाहर फेंके और RTI माध्यम से सरकार से सवाल करे की अगर ये अगर अमेरिका मे ban है तो भारत मे क्यूँ बिक रही है !! एक भाई ने 28 जनवरी 2013 को RTI की website पर सवाल भी पूछा था लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया !!
vicks पेट्रोलियम जेल्ली से बनता है जिसकी कीमत 60 -70 रुपिया किलो है और विक्स की बिक्री में procter and gamble कंपनी को 20000 % से जादा का मुनाफा है | ये मुनाफा आप की जेब से लूटा जा रहा है और सरकार इस घोटाले में शामिल है | सरकार ने लाइसेन्स दे रखी है, आँखे बंद कर रखी है और कंपनी देश को लूटा जा रहा है |

आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !!

एक बार यहाँ जरूर click करे !

http://www.youtube.com/watch?v=ZH9KSgJKoQE


अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !

वन्देमातरम !!

Indian Citizenship Act Exposed


आप भारत के नागरिक है इसका एक कानून है “Indian Citizenship Act” indianवो भी अंग्रेजो का बनाया हुआ है | आज़ादी के बाद हम उसमे संशोधन नही कर पाए | और येही कारण है अंग्रेजो ने वो कानून बनाया था इस हिसाब से के अंग्रेज भी इस देश के नागरिक हो सके | इस हिसाब से उस कानून
की ड्राफ्टिंग की गयी है के विदेश से आकर लन्दन से आकर कोई आदमी भारत मे रेहने लगे और इतने साल तक रह ले तो वो भी भारत की नागरिकता का अधिकारी हो जाता है इसलिए उन्होंने ड्राफ्टिंग ऐसी की थी | आज़ादी के बाद हमने उसमे थोडा भी संशोधन नही किया -

>तो कोई भी विदेशी भारत मे आके नागरिक हो सकता है, 
>और नागरिक हो सकता है तो चुनाव लड़ सकता है,
>चुनाव लड़ सकता है तो MP, MLA हो सकता है,
>MP, MLA हो सकता है तो मिनिस्टर हो सकता है,
>मिनिस्टर हो सकता है तो प्रधानमंत्री हो सकता है,
>जो प्रधानमंत्री हो सकता है वो राष्ट्रपति भी हो सकता है,

तो आज़ादी का मैखोल नही तो क्या ?? दुनिया के किसी देश के संविधान मे यह व्यवस्था नही है | आप अमेरिका मे जाये रहना शुरू कर दे आपको ग्रीन कार्ड मिल जायेगा | लेकिन आप अमेरिका के राष्ट्रपति नही हो सकते जब तक आपका जन्म अमेरिका मे नही हुआ हो | आप कनाडा मे जाये, कनाडा के संविधान का अध्ययन करें, कनाडा के संविधान के अनुसार आप कनाडा की नागरिकता ले सकते है लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री नही हो सकते जब तक की आपका मूल जन्मस्थान कनाडा न हो | ब्रिटेन मे चले जाइये, फ्रांस, जर्मनी चले जाये दुनिया मे करीब 200 देश लगभग 2-3 देशो को छोड़ कर सभि देशो मे यह नियम है के जबतक की आप उस देश की धरती पर पैदा नही होते आप उस देश के संविधानिक पदों पर नही बैठ सकते | भारत मे ऐसी व्यवस्था नही है विदेश धरती पर पैदा हुआ कोई भी आदमी भारत मे आ कर नागरिकता ले सकता है और इस देश के सर्वोच्च शीर्ष संविधानिक पदों पर बैठ सकता है आप उसे रोक नही सकते | कानून है “Indian Citizenship Act” उसमे यह व्यवस्था है | अब अंग्रेजो की ज़माने की व्यवस्था है हम उसि को चला रहे है उसि को ढो रहे है |

अधिक जानकरी के लिए यहाँ क्लिक करें : 
https://www.youtube.com/watch?v=BkTG58EHjuI

Thursday, September 26, 2013

Jan Gan Man VS Vandemataram Must Read/Watch Before Singing


Jan Gan Man VS Vandemataram

Jan Gan Man VS Vandemataram Must Read/Watch Before Singing 

जन गन मन vs वन्देमातरम !!
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‘’वन्देमातरम’’ बंकिमचंद्र चटर्जी ने लिखा था ! उन्होने इस गीत को लिखा !लिखने के बाद 7 साल लगे जब यह गीत लोगो के सामने आया ! क्यूँ की उन्होने जब इस गीत लो लिखा उसके बाद उन्होने एक उपन्यास लिखा जिसका नाम था ‘’आनद मठ’’ उसमे इस गीत को डाला !वो उपन्यास छपने मे 7 साल लगे !


1882 आनद मठ उपनास का हिस्सा बना वन्देमातरम और उसके बाद जब लोगो ने इसको पढ़ा तो इसका अर्थ पता चला की वन्देमातरम क्या है ! आनद मठ उपन्यास बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था अँग्रेजी सरकार के विरोध मे और उन राजा महाराजाओ के विरोध मे जो किसी भी संप्रदाय के हो लेकिन अँग्रेजी सरकार को सहयोग करते थे ! फिर उसमे उन्होने बगावत की भूमिका लिखी कि अब बगावत होनी चाहिए !विरोध होना चाहिए ताकि इस अँग्रेजी सत्ता को हम पलट सके ! और इस तरह वन्देमातरम को सार्वजनिक गान बनना चाहिए ये उन्होने घोषित किया !

उनकी एक बेटी हुआ करती थी जिसका अपने पिता बंकिमचंद्र चटर्जी जी से इस बात पर बहुत मत भेद था ! उनकी बेटी कहती थी आपने यह वन्देमातरम लिखा है उसके ये श्बद बहुत कलिष्ट हैं ! कि बोलने और सुनने वाले कि ही समझ में नहीं आएंगे ! इसलिए गीत को आप इतना सरल बनाइये कि बोलने और सुनने वाले कि समझ मे आ सके !

तब बंकिम चंद्र चटर्जी ने कहा देखो आज तुमको यह कलिष्ट लग रहा हो लेकिन मेरी बात याद रखना एक दिन ये गीत हर नोजवान के होंटो पर होगा और हर क्रांतिवीर कि प्रेरणा बनेगा ! और हम सब जानते है इस घोषणा के 12 साल बाद बंकिम चंद्र चटर जी का स्वर्गवास हो गया ! बाद मे उनके बेटी और परिवार ने आनद मठ पुस्तक जिसमे ये गीत था उसका बड़े पेमाने पर प्रचार किया !

वो पुस्तक पहले बंगला मे बनी बाद मे उसका कन्नड ,मराठी तेलगु ,हिन्दी आदि बहुत भाषा मे छपी ! उस पुस्तक ने क्रांतिकारियों मे बहुत जोश भरने का काम किया ! उस पुस्तक मे क्या था कि इस पूरी अँग्रेजी व्यवस्था का विरोध करे क्यू कि यह विदेशी है ! उसमे ऐसे बहुत सी जानकारिया थी जिसको पढ़ कर लोग बहुत उबलते थे !और वो लोगो मे जोश भरने का काम करती थी ! अँग्रेजी सरकार ने इस पुस्तक पर पाबंदी लगाई कई बार इसको जलाया गया ! लेकिन इस कोई न कोई एक मूल प्रति बच ही
जाती ! और आगे बढ़ती रहती !

1905 मे अंग्रेज़ो की सरकार ने बंगाल का बंटवारा कर दिया एक अंग्रेज़ अधिकारी था उसका नाम था कर्ज़न ! उसने बंगाल को दो हिस्सो मे बाँट दिया !एक पूर्वी बंगाल एक पश्चमी बंगाल ! पूर्वी बंगाल था मुसलमानो के लिए पश्चमी बगाल था हिन्दुओ के लिए !! हिन्दू और मूसलमान के आधार पर यह पहला बंटवारा था !

तो भारत के कई लोग जो जानते थे कि आगे क्या हो सकता है उन्होने इस बँटवारे का विरोध किया ! और भंग भंग के विरोध मे एक आंदोलन शुरू हुआ ! और इस आंदोलन के प्रमुख नेता थे (लाला लाजपतराय) जो उत्तर भारत मे थे !(विपिन चंद्र पाल) जो बंगाल और पूर्व भारत का नेतत्व करते थे ! और लोक मान्य बाल गंगाधर तिलक जो पश्चिम भारत के बड़े नेता थे ! इस तीनों नेताओ ने अंग्रेज़ो के बंगाल विभाजन का विरोध शुरू किया ! इस आंदोलन का एक हिस्सा था (अंग्रेज़ो भारत छोड़ो) (अँग्रेजी सरकार का असहयोग) करो ! (अँग्रेजी कपड़े मत पहनो) (अँग्रेजी वस्तुओ का बहिष्कार करो) ! और दूसरा हिस्सा था पोजटिव ! कि भारत मे स्वदेशी का निर्माण करो ! स्वदेशी पथ पर आगे बढ़ो !

लोकमान्य तिलक ने अपने शब्दो मे इसको स्वदेशी आंदोलन कहा ! अँग्रेजी सरकार इसको भंग भंग विरोधे आंदोलन कहती रही !लोकमान्य तिलक कहते थे यह हमारा स्वदेशी आंदोलन है ! और उस आंदोलन के ताकत इतनी बड़ी थी !कि यह तीनों नेता अंग्रेज़ो के खिलाफ जो बोल देते उसे पूरे भारत के लोग अपना लेते ! जैसे उन्होने आरके इलान किया अँग्रेजी कपड़े पहनना बंद करो !करोड़ो भारत वासियो ने अँग्रेजी कपड़े पहनना बंद कर दिया ! उयर उसी समय भले हिंदुतसनी कपड़ा मिले मोटा मिले पतला मिले वही पहनना है ! फिर उन्होने कहाँ अँग्रेजी बलेड का ईस्टमाल करना ब्नद करो ! तो भारत के हजारो नाईयो ने अँग्रेजी बलेड से दाड़ी बनाना बंद करदिया ! और इस तरह उस्तरा भारत मे वापिस आया ! फिर लोक मान्य तिलक ने कहा अँग्रेजी चीनी खाना बंद करो ! क्यू कि चीनी उस वक्त इंग्लैंड से बन कर आती थी

भारत मे गुड बनाता था ! तो हजारो लाखो हलवाइयों ने गुड दाल कर मिठाई बनाना शुरू कर दिया ! फिर उन्होने अपील लिया अँग्रेजी कपड़े और अँग्रेजी साबुन से अपने घरो को मुकत करो ! तो हजारो लाखो धोबियो ने अँग्रेजी साबुन से कपड़े धोना मुकत कर दिया !फिर उन्होने ने पंडितो से कहा तुम शादी करवाओ अगर तो उन लोगो कि मत करवाओ जो अँग्रेजी वस्त्र पहनते हो ! तो पंडितो ने सूट पैंट पहने टाई पहनने वालों का बहिष्कार कर दिया !

इतने व्यापक स्तर पर ये आंदोलन फैला !कि 5-6 साल मे अँग्रेजी सरकार घबरागी क्यूंकि उनका माल बिकना बंद हो गया ! ईस्ट इंडिया कंपनी का धंधा चोपट हो गया ! तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंग्रेज़ सरकार पर दबाव डाला ! कि हमारा तो धंधा ही चोपट हो गया भारत मे ! हमारे पास कोई उपाय नहीं है आप इन भारतवासियो के मांग को मंजूर करो मांग क्या थी कि यह जो बंटवारा किया है बंगाल का हिन्दू मुस्लिम से आधार पर इसको वापिस लो हमे बंगाल के विभाजन संप्रदाय के आधार पर नहीं चाहिए
! और आप जानते अँग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा ! और 1911 मे divison of bangal
act वापिस लिया गया ! इतनी बड़ी होती है बहिष्कार कि ताकत !

तो लोक मान्य तिलक को समझ आ गया ! अगर अंग्रेज़ो को झुकाना है ! तो बहिष्कार ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है ! यह 6 साल जो आंदोलन चला इस आंदोलन का मूल मंत्र था वन्देमातरम ! जीतने क्रांतिकारी थे लोक मान्य बाल गंगाधर तिलक,लाला लाजपत राय ,विपिन चंद्र पाल के साथ उनकी संख्या !1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा थी ! वो हर कार्यक्रम मे वन्देमातरम गाते थे ! कार्यक्रम कि शुरवात मे वन्देमातरम ! कार्यक्रम कि समाप्ति पर वन्देमातरम !!


उसके बाद क्या हुआ अंग्रेज़ अपने आप को बंगाल से असुरक्षित महसूस करने लगे !क्यूंकि बंगाल इस आंदोलन का मुख्य केंद्र था ! सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था। सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए …के कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911 में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया। पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे
हुए थे तो …अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये। इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया।

रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा। उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक (Director) रहे। उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था। और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए।

रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है “जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता”। इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था। इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है “भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है। हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो। तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा मतलब महारास्त्र, द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है , तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है। तुम्हारी ही हम गाथा गाते है। हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो। ” में ये गीत गाया गया।

जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया। जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की। वह बहुत खुश हुआ। उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके (जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये। रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए। जोर्ज पंचम उस समय नोबल
पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था। उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया। तो रविन्द्र नाथ टैगोर ने इस नोबल पुरस्कार को लेने से मना कर दिया। क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब डांटा था। टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है। जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया।

रविन्द्र नाथ टैगोर की ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलिया वाला कांड हुआ और गाँधी जी ने लगभग गाली की भाषा में उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा, तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक
तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली। इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया।

सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे। रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे। अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) । इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत ‘जन गण मन’ अंग्रेजो के द्वारा
मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है। इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है। इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है।लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे।

7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया, और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये। 1941 तक कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी। लेकिन वह दो खेमो में बट गई। जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दुसरे खेमे में मोती लाल नेहरु के समर्थक थे। मतभेद था सरकार बनाने को लेकर। एक दल चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार (Coalition Government) बने। जबकिदूसरे दल वाले कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार
बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है। इस मतभेद के कारण एक नरम दल और एक गरम दल। बन गया गया !गर्म दल वे हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे। और (यहाँ मैं स्पष्ट कर दूँ कि गांधीजी उस समय तक कांग्रेस की आजीवन सदस्यता से इस्तीफा दे चुके थे, वो किसी तरफ नहीं थे, लेकिन गाँधी जी दोनों पक्ष के लिए आदरणीय थे क्योंकि गाँधी जी देश के लोगों के आदरणीय थे)। लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे।

नरम दल वाले अंग्रेजों के समर्थक थे और अंग्रेजों को ये गीत पसंद नहीं था तो अंग्रेजों के कहने पर नरम दल वालों ने उस समय एक हवा उड़ा दी कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) है। और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है। उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे। उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि जिन्ना भी देखने भर को (उस समय तक) भारतीय थे मन,कर्म और
वचन से अंग्रेज ही थे उन्होंने भी अंग्रेजों के इशारे पर ये कहना शुरू किया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया।

जब भारत सन 1947 में स्वतंत्र हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली। संविधान सभा की बहस चली। संविधान सभा के 319 में से 318 सांसद ऐसे थे जिन्होंने बंकिम बाबु द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्र गान स्वीकार करने पर सहमति जताई। बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना। और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु। उनका तर्क था कि वन्दे मातरम गीत से मुसलमानों के दिल को चोट पहुचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (दरअसल इस गीत से मुसलमानों को नहीं अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचती थी)। अब इस झगडे का फैसला कौन करे, तो वे पहुचे गाँधी जी के पास। गाँधी जी ने कहा कि जन गन मन के पक्ष में तो मैं भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत तैयार किया जाये। तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा”। लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुए। नेहरु जी का तर्क था कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता
और जन गन मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है।

उस समय बात नहीं बनी तो नेहरु जी ने इस मुद्दे को गाँधी जी की मृत्यु तक टाले रखा और उनकी मृत्यु के बाद नेहरु जी ने जन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिय और जबरदस्ती भारतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है, और दूसरा पक्ष नाराज न हो इसलिए वन्दे मातरम को राष्ट्रगीत बना दिया गया लेकिन कभी गया नहीं गया। नेहरु जी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते थे जिससे कि अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचे,


मुसलमानों के वो इतने हिमायती कैसे हो सकते थे जिस आदमी ने पाकिस्तान बनवा दिया जब कि इस देश के मुसलमान पाकिस्तान नहीं चाहते थे, जन गण मन को इस लिए तरजीह दी गयी क्योंकि वो अंग्रेजों की भक्ति में गाया गया गीत था और वन्देमातरम इसलिए पीछे रह गया क्योंकि इस गीत से अंगेजों को दर्द होता था।


अभी कुछ दिन पहले भारत सरकार ने एक सर्वे किया था अभी उसकी रिपोर्ट आई है अर्जुन सिंह की मणिस्ट्री मे है ! पूरे भारत के लोगो से पूछा गया कि आपको कौन सा गीत पसंद है ! जन गन मन या वन्देमातरम !! 98.8 %लोगो ने कहा है वन्देमातरम !!

अभी कुछ साल पहले बीबीसी ने एक सर्वे किया था। उसने पूरे संसार में जितने भी भारत के लोग रहते थे, उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौन सा गीत ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम। बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय गीतों में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम है। कई देश है जिनके लोगों को इसके बोल समझ में नहीं आते है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है। तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का। अब ये आप को तय करना है कि आपको क्या गाना है !!



must must must click here

https://www.youtube.com/watch?v=TP6aM3WHJL0

अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !

वन्देमातरम !!

Stop Using Nestle Maggi And Save Cows - Maggi is Non-Veg


दोस्तो याद रखना क्रांतिकारी मंगलपांडे को ! जिसने आजादी की पहली गोली गौ माता की रक्षा के लिए चलाई थी ! और अंग्रेज़ मेजर हयूसन को उड़ा दिया था !
और फिर उनको फांसी हुई !

हमारे क्रांतिवीर गौ माता के रक्षा के लिए फांसी पर चढ़े है !!

और आप गौ माता की रक्षा के लिए इस विदेशी कंपनी nestle से समान खरीदना बंद नहीं कर सकते ???

याद रखो ये वही विदेशी कंपनी nestle है ! जो अपनी चाकलेट kitkat मे गाय के बछड़े के मांस का रस मिलती है !!

9 साल पहले जब भाई राजीव दीक्षित जी ने कहा कि ये विदेशी कंपनी nestle maggi मे सूअर के मास का रस मिलाती है ! तो लोगो ने उन पर बहुत बकवास की ! ये आदमी दिमाग खराब है ये कोई देहाती है ! और पता नहीं क्या क्या बोला ! आज वही nestle कंपनी खुद मानती है कि वे अपनी चाकलेट kitkat मे बछड़े के मांस का रस मिलाती है ! तो क्या दूसरी चीजों मे नहीं मिलती होगी ????????


मानसिक गुलामी की जंजीरों मे जकड़े लोग ऐसे बातों पर तब तक विश्वास नहीं करेंगे जब तक अमीर खान 4 करोड़ रुपए लेकर सत्य मेव जयते मे नहीं बोलेगा !! 

यहाँ जरूर click करे !! 
http://www.youtube.com/watch?v=uru3hk35S-A

वन्देमातरम
जय गौ माता !!

Do Not Use Any Product of JOHNSON Company


अपने बच्चो को Johnson & Johnson विदेशी कंपनी के जहरीले उत्पादो से बचाये !
और उन हरामखोर डाक्टरों से भी बचें जो इस कंपनी से मिलने वालों टुकड़ो की खातिर
आपके बच्चो की जान को दाव पर लगा देते हैं ! और आपको इस कंपनी के
products इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं !
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The History of Plastic Surgery - Invented in India A Awesome Invention


प्लास्टिक सर्जरी (Plastic Surgery) जो आज की सर्जरी की दुनिया मे आधुनिकतम विद्या है इसका अविष्कार भारत मे हुअ है| सर्जरी का अविष्कार तो हुआ हि है प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार भी यहाँ हि हुआ है| प्लास्टिक सर्जरी मे कहीं की प्रचा को काट के कहीं लगा देना और उसको
इस तरह से लगा देना की पता हि न चले यह विद्या सबसे पहले दुनिया को भारत ने दी है|

1780 मे दक्षिण भारत के कर्णाटक राज्य के एक बड़े भू भाग का राजा था हयदर अली| 1780-84 के बीच मे अंग्रेजों ने हयदर अली के ऊपर कई बार हमले किये और एक हमले का जिक्र एक अंग्रेज की डायरी मे से मिला है| एक अंग्रेज का नाम था कोर्नेल कूट उसने हयदर अली पर हमला किया पर युद्ध मे अंग्रेज परास्त हो गए और हयदर अली ने कोर्नेल कूट की नाक काट दी| 

कोर्नेल कूट अपनी डायरी मे लिखता है के “मैं पराजित हो गया, सैनिको ने मुझे बन्दी बना लिया, फिर मुझे हयदर अली के पास ले गए और उन्होंने मेरा नाक काट दिया|” फिर कोर्नेल कूट लिखता है के “मुझे घोडा दे दिया भागने के लिए नाक काट के हात मे दे दिया और कहा के भाग जाओ तो मैं घोड़े पे बैठ के भागा| भागते भागते मैं बेलगाँव मे आ गया, बेलगाँव मे एक वैद्य ने मुझे देखा और पूछा मेरी नाक कहाँ कट गयी? तो मैं झूट बोला के किसीने पत्थर मार दिया, तो वैद्य ने बोला के यह पत्थर मारी हुई नाक नही है यह तलवार से काटी हुई नाक है, मैं वैद्य हूँ मैं जानता हूँ| तो मैंने वैद्य से सच बोला के मेरी नाक काटी गयी है| वैद्य ने पूछा किसने काटी? मैंने बोला तुम्हारी राजा ने काटी| वैद्य ने पूछा क्यों काटी तो मैंने बोला के उनपर हमला किया इसलिए काटी|फिर वैद्य बोला के तुम यह काटी हुई नाक लेके क्या करोगे? इंग्लैंड जाओगे? तो मैंने बोला इच्छा तो नही है फिर भी जाना हि पड़ेगा|”

यह सब सुनके वो दयालु वैद्य कहता है के मैं तुम्हारी नाक जोड़ सकता हूँ, कोर्नेल कूट को पहले विस्वास नही हुआ, फिर बोला ठेक है जोड़ दो तो वैद्य बोला तुम मेरे घर चलो| फिर वैद्य ने कोर्नेल को ले गया और उसका ऑपरेशन किया और इस ऑपरेशन का तिस पन्ने मे वर्णन है| ऑपरेशन सफलता पूर्वक संपन्न हो गया नाक उसकी जुड़ गयी, वैद्य जी ने उसको एक लेप दे दिया बनाके और कहा की यह लेप ले जाओ और रोज सुबह शाम लगाते रहना| वो लेप लेके चला गया और 15-17 दिन के बाद बिलकुल नाक उसकी जुड़ गयी और वो जहाज मे बैठ कर लन्दन चला गया| 

फिर तिन महीने बाद ब्रिटिश पार्लियामेन्ट मे खड़ा हो कोर्नेल कूट भाषण दे रहा है और सबसे पहला सवाल पूछता है सबसे के आपको लगता है के मेरी नाक कटी हुई है? तो सब अंग्रेज हैरान होक कहते है अरे नही नही तुम्हारी नाक तो कटी हुई बिलकुल नही दिखती| फिर वो कहानी सुना रहा है ब्रिटिश पार्लियामेन्ट मे के मैंने हयदर अली पे हमला किया था मैं उसमे हार गया उसने मेरी नाक काटी फिर भारत के एक वैद्य ने मेरी नाक जोड़ी और भारत की वैद्यों के पास इतनी बड़ी हुनर है इतना बड़ा ज्ञान है की वो काटी हुई नाक को जोड़ सकते है| 

फिर उस वैद्य जी की खोंज खबर ब्रिटिश पार्लियामेन्ट मे ली गयी, फिर अंग्रेजो का एक दल आया और बेलगाँव की उस वैद्य को मिला, तो उस वैद्य ने अंग्रेजो को बताया के यह काम तो भारत के लगभग हर गाँव मे होता है; मैं एकला नहीं हूँ ऐसा करने वाले हजारो लाखों लोग है| तो अंग्रेजों को हैरानी हुई के कोन सिखाता है आपको ? तो वैद्य जी कहने लगे के हमारे इसके गुरुकुल चलते है और गुरुकुलों मे सिखाया जाता है|

फिर अंग्रेजो ने उस गुरुकुलों मे गए उहाँ उन्होंने एडमिशन लिया, विद्यार्थी के रूप मे भारती हुए और सिखा, फिर सिखने के बाद इंग्लॅण्ड मे जाके उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी शुरू की| और जिन जिन अंग्रेजों ने भारत से प्लास्टिक सर्जरी सीखी है उनकी डायरियां हैं| एक अंग्रेज अपने डायरी मे लिखता है के ‘जब मैंने पहली बार प्लास्टिक सर्जरी सीखी, जिस गुरु से सीखी वो भारत का विशेष आदमी था और वो नाइ था जाती का| मने जाती का नाइ, जाती का चर्मकार या कोई और हमारे यहाँ ज्ञान और हुनर के बड़े पंडित थे| नाइ है, चर्मकार है इस आधार पर किसी गुरुकुल मे उनका प्रवेश वर्जित नही था, जाती के आधार पर हमारे गुरुकुलों मे प्रवेश नही हुआ है, और जाती के आधार पर हमारे यहाँ शिक्षा की भी व्यवस्था नही था| वर्ण व्यवस्था के आधार पर हमारे यहाँ सबकुछ चलता रहा| तो नाइ भी सर्जन है चर्मकार भी सर्जन है| और वो अंग्रेज लिखता है के चर्मकार जादा अच्चा सर्जन इसलिए हो सकता है की उसको चमड़ा सिलना सबसे अच्छे तरीके से आता है|

एक अंग्रेज लिख रहा है के ‘मैंने जिस गुरु से सर्जरी सीखी वो जात का नाइ था और सिखाने के बाद उन्होंने मुझसे एक ऑपरेशन करवाया और उस ऑपरेशन की वर्णन है| 1792 की बात है एक मराठा सैनिक की दोनों हात युद्ध मे कट गए है और वो उस वैद्य गुरु के पास कटे हुए हात लेके आया है जोड़ने के लिए| तो गुरु ने वो ऑपरेशन उस अंग्रेज से करवाया जो सिख रहा था, और वो ऑपरेशन उस अंग्रेज ने गुरु के साथ मिलके बहुत सफलता के साथ पूरा किया| और वो अंग्रेज जिसका नाम डॉ थॉमस क्रूसो था अपनी डायरी मे कह रहा है के “मैंने मेरे जीवन मे इतना बड़ा ज्ञान किसी गुरु से सिखा और इस गुरु ने मुझसे एक पैसा नही लिया यह मैं बिलकुल अचम्भा मानता हूँ आश्चर्य मानता हूँ|” और थॉमस क्रूसो यह सिख के गया है और फिर उसने प्लास्टिक सेर्जेरी का स्कूल खोला, और उस स्कूल मे फिर अंग्रेज सीखे है, और दुनिया मे फैलाया है| दुर्भाग्य इस बात का है के सारी दुनिया मे प्लास्टिक सेर्जेरी का उस स्कूल का तो वर्णन है लेकिन इन वैद्यो का वर्णन अभी तक नही आया विश्व ग्रन्थ मे जिन्होंने अंग्रेजो को प्लास्टिक सेर्जेरी सिखाई थी|

अगर आप पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ Click करें: 
http://www.youtube.com/watch?v=ZO-bpE9NYUA


आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद् 
वन्देमातरम 
भारत माता की जय

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बिच्छू काटने पर चिकित्सा : अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें:



http://www.youtube.com/watch?v=N4iEd5Ku9lQ


बिच्छू काटने पर बहुत दर्द होता है जिसको बिच्छू काटता है उसके सिवा और कोई जान नही सकता कितना भयंकर कष्ट होता है। तो बिच्छू काटने पर एक दावा है उसका नाम है Silicea 200 इसका लिकुइड 5 ml घर में रखे । बिच्छू काटने पर इस दावा को जीभ पर एक एक ड्रोप 10-10 मिनट अंतर पर तिन बार देना है । बिच्छू जब काटता है तो उसका जो डंक है न उसको अन्दर छोड़ देता है वोही दर्द करता है । इस डंक को बाहर निकलना आसान काम नही है, डॉक्टर के पास जायेंगे वो काट करेगा चीरा लगायेगा फिर खिंच के निकालेगा उसमे उसमे ब्लीडिंग भी होगी तकलीफ भी होगी । ये मेडिसिन इतनी बेहतरीन मेडिसिन है के आप इसके तिन डोस देंगे 10-10 मिनट पर एक एक बूंद और आप देखेंगे वो डंक अपने आप निकल कर बाहर आ जायेगा। सिर्फ तिन डोस में आधे घन्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते है। बहुत जबरदस्त मेडिसिन है ये Silicea 200. और ये मेडिसिन मिट्टी से बनती है,वो नदी कि मिट्टी होती है न जिसमे थोड़ी बालू रहती है उसी से ये मेडिसिन बनती है ।

इस मेडिसिन को और भी बहुत सारी काम में आती है । अगर आप सिलाई मशीन में काम करती है तो कभी कभी सुई चुव जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये मेडिसिन ले लीजिये ये सुई को भी बाहर निकाल देगा। आप इस मेडिसिन को और भी कई केसेस में व्यवहार कर सकते है जैसे कांटा लग गया हो , कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमखी ने काट लिया हो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते है वो सब के लिए आप इसको ले सकते है । बहुत तेज दर्द निवारक है और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है उसको बाहर निकलने की मेडिसिन है । 
बहुत सस्ता मेडिसिन है 5 ml सिर्फ 10 रूपए की आती है इससे आप कम से कम 50 से 100 लोगों का भला कर सकते है । 

वन्देमातरम्

Truth Behind Theorem of Pythagoras Exposed


पईथागोरस थेओरम !
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एक प्रमेय होती है जिसका हम नवमी-दसमी से लेकर बारह्वी कक्षा तक प्रयोग करते हैं, जिसे हम पईथागोरस थेओरम कहते हैं| पईथागोरस का जन्म हुआ ईशा से आठ शताब्दी पहले और ईशा के पंद्रहवी शताब्दी पहले के भारत के गुरुकुलों के रिकार्ड्स बताते हैं कि वो प्रमेय हमारे यहाँ था, उसको हम बोधायन प्रमेय के
रूप में पढ़ते थे|

बोधायन एक महिर्षि हुए उनके नाम से भारत में ये प्रमेय ईशा के जन्म के पंद्रहवी शताब्दी पहले पढाई जाती थी यानि आज से लगभग साढ़े तीन हज़ार साल पहले भारत में वो प्रमेय पढाई जाती थी, बोधायन प्रमेय के नाम से और वो प्रमेय है - किसी आयत के विकर्ण द्वारा व्युत्पन्न क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई द्वारा पृथक-पृथक व्युत्पन्न क्षेत्र फलों के योग के बराबर होता है। तो ये प्रमेय महिर्षि बोधायन की देन है जिसे हम आज भी पढ़ते हैं और पईथागोरस ने बेईमानी करके उसे अपने नाम से प्रकाशित करवा लिया है और सारी दुनिया आजतक भ्रम में है | 
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शुल्ब सूत्र या शुल्बसूत्र संस्कृत के सूत्रग्रन्थ हैं जो स्रौत कर्मों से सम्बन्धित हैं। इनमें यज्ञ-वेदी की रचना से सम्बन्धित ज्यामितीय ज्ञान दिया हुआ है। संस्कृत कें शुल्ब शब्द का अर्थ नापने की रस्सी या डोरी होता है। अपने नाम के अनुसार शुल्ब सूत्रों में यज्ञ-वेदियों को नापना, उनके लिए स्थान का चुनना तथा उनके निर्माण आदि विषयों का विस्तृत वर्णन है। ये भारतीय ज्यामिति के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। 

शुल्बसूत्र, स्रौत सूत्रों के भाग हैं ; स्रौतसूत्र, वेदों के उपांग (appendices) हैं। शुल्बसूत्र ही भारतीय गणित के सम्बन्ध में जानकारी देने वाले प्राचीनतम स्रोत हैं।
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शुल्बसूत्रों में बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे प्राचीन माना जाता है। इन शुल्बसूत्रों का रचना समय १२०० से ८०० ईसा पूर्व माना गया है।

अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियम दिया है-

दीर्घचातुरास्रास्याक्ष्नाया रज्जुः पार्च्च्वमानी तिर्यङ्मानीच |
यत्पद्ययग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति ||

एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं। यहीं तो पाइथागोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। दरअसल इस प्रमेय को बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय कहा जाना चाहिए। 
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अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें : 
http://www.youtube.com/watch?v=Uq2moF38H4M

वन्दे मातरम्
JaY Hind